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​गया में सफाई व्यवस्था ठप: वेतन के लिए नगर निगम कर्मियों की ‘आर-पार’ की लड़ाई, सड़कों पर लगे कूड़े के ढेर

बिहार की धार्मिक और ऐतिहासिक नगरी गया इस समय एक गंभीर नागरिक संकट (Civic Crisis) से जूझ रही है। गया नगर निगम के हजारों सफाई कर्मियों और कर्मचारियों ने अपनी 10 सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। हड़ताल के पहले ही दिन शहर की सूरत बिगड़ने लगी है और गलियों से लेकर मुख्य सड़कों तक गंदगी का अंबार दिखना शुरू हो गया है।

वेतन नहीं तो काम नहीं: कर्मचारियों का दर्द

​बिहार लोकल बॉडीज एम्प्लाइज फेडरेशन के बैनर तले आयोजित इस हड़ताल का मुख्य कारण पिछले तीन महीनों से लंबित वेतन है। कर्मचारियों का आरोप है कि नगर निगम प्रशासन उनके प्रति संवेदनहीन बना हुआ है।

​आंदोलनकारी कर्मचारियों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए कहा कि वेतन न मिलने से उनके घरों में ‘चूल्हा जलना’ मुश्किल हो गया है। कई कर्मियों ने बताया कि:

  • आर्थिक तंगी: दुकानदार अब उधार देने से मना कर रहे हैं।
  • शिक्षा पर असर: बच्चों की स्कूल फीस जमा न होने के कारण उनकी पढ़ाई अधर में लटकी है।
  • मानसिक दबाव: बकाया चुकाने के लिए कर्जदारों के तकादे ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया है।

10 सूत्री मांगें: सिर्फ वेतन ही मुद्दा नहीं

​कर्मचारियों की यह हड़ताल केवल वेतन तक सीमित नहीं है। उनकी 10 सूत्री मांगों में सेवा स्थायीकरण, समान काम के लिए समान वेतन, और बेहतर कार्य परिस्थितियों जैसे महत्वपूर्ण बिंदु शामिल हैं। फेडरेशन के नेताओं का कहना है कि जब तक सरकार और निगम प्रशासन लिखित में ठोस आश्वासन नहीं देते, तब तक कूड़ा उठाने वाली गाड़ियां गैरेज से बाहर नहीं निकलेंगी।

सफाई व्यवस्था चरमराई: जनता परेशान

​गया, जहाँ हर दिन हजारों श्रद्धालु विष्णुपद मंदिर और बोधगया दर्शन के लिए आते हैं, वहां सफाई व्यवस्था का ठप होना एक बड़ी चुनौती है।

  1. कूड़े के ढेर: शहर के चौक-चौराहों पर कचरे का पहाड़ खड़ा होने लगा है।
  2. दुर्गंध और बीमारियाँ: गर्मी के मौसम में कूड़े के सड़ने से बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है।
  3. यातायात बाधित: कई जगहों पर सड़क के बीचों-बीच कूड़ा जमा होने से वाहनों की आवाजाही पर भी असर पड़ रहा है।
क्षेत्रहड़ताल का प्रभाव
सफाई विभाग100% काम बंद, डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन ठप।
पेयजल आपूर्तिआंशिक रूप से प्रभावित होने की संभावना।
नगर निगम कार्यालयप्रशासनिक कार्य और पब्लिक डीलिंग पूरी तरह बंद।

प्रशासन की चुप्पी और विपक्ष के तेवर

​नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों ने फिलहाल इस मामले पर कोई सख्त रुख नहीं अपनाया है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि प्रशासन वैकल्पिक व्यवस्था करने की कोशिश में जुटा है। दूसरी ओर, स्थानीय विपक्षी नेताओं ने कर्मचारियों की मांगों को जायज ठहराते हुए सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि “स्मार्ट सिटी” की बात करने वाली सरकार अपने सफाई योद्धाओं को वेतन तक नहीं दे पा रही है।

क्या होगा आगे?

​अगर यह हड़ताल लंबी खिंचती है, तो गया शहर में महामारी जैसी स्थिति पैदा हो सकती है। कर्मचारियों ने साफ कर दिया है कि वे इस बार झुकने वाले नहीं हैं। सरकार को जल्द ही बीच का रास्ता निकालना होगा ताकि न केवल कर्मियों के घरों में दिवाली मने, बल्कि गया शहर को भी इस ‘गंदगी के संकट’ से मुक्ति मिल सके।

निष्कर्ष

​गया नगर निगम की यह हड़ताल प्रशासन की विफलता और कर्मचारियों के धैर्य की पराकाष्ठा का परिणाम है। शहर की जनता अब प्रशासन से उम्मीद कर रही है कि वह जल्द से जल्द बातचीत की मेज पर आए और इस अनिश्चितकालीन गतिरोध को समाप्त करे।

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