नीतीश कुमार का विदाई संदेश: “2030 तक का इंतजाम कर जा रहा हूं”, इस्तीफे के बाद ‘सुशासन बाबू’ ने बताया बिहार का फ्यूचर प्लान
बिहार की राजनीति के एक युग का समापन हो गया है। 20 वर्षों तक सूबे की कमान संभालने वाले नीतीश कुमार ने आखिरकार राज्यपाल को अपना इस्तीफा सौंप दिया। लेकिन जाते-जाते उन्होंने यह स्पष्ट कर दिया कि वह भले ही कुर्सी छोड़ रहे हों, लेकिन बिहार के विकास का जो बीज उन्होंने बोया है, उसका खाका 2030 तक के लिए तैयार है।
सोशल मीडिया पर भावुक संदेश: 2005 से 2026 तक का सफर
इस्तीफा देने के बाद नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया के माध्यम से बिहार की जनता को संबोधित किया। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे 24 नवंबर 2005 को जब पहली बार एनडीए की सरकार बनी थी, तब बिहार की स्थिति क्या थी और आज क्या है। उन्होंने लिखा:
”राज्य में कानून का राज स्थापित करना हमारी पहली प्राथमिकता थी। हमने बिना किसी भेदभाव के हिंदू, मुस्लिम, दलित, महादलित और पिछड़ा वर्ग समेत समाज के हर तबके के लिए काम किया है।”
सात निश्चय-3: 2030 तक का मास्टरप्लान
नीतीश कुमार ने अपने संदेश में सबसे बड़ी बात ‘सात निश्चय-3’ को लेकर कही। उन्होंने कहा कि विपक्ष भले ही कुछ भी कहे, लेकिन उन्होंने अगले 5 वर्षों (2025-2030) के विकास की रूपरेखा तैयार कर दी है।
- विकास को गति: सात निश्चय-3 के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जाएगा।
- युवा और महिला: अगले चरण में युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर और महिलाओं के स्वावलंबन पर विशेष जोर रहेगा।
- केंद्र का सहयोग: नीतीश ने विकास कार्यों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहयोग के लिए उन्हें ‘नमन’ किया और आभार जताया।
“अब नई सरकार संभालेगी कमान, मेरा रहेगा मार्गदर्शन”
जदयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पद छोड़ने का निर्णय उन्होंने पहले ही ले लिया था। उन्होंने नई आने वाली सरकार को अपना पूर्ण सहयोग और मार्गदर्शन देने का वादा किया। नीतीश ने कहा:
- सेवा का संकल्प: “हमने लंबे समय तक निरंतर बिहार की सेवा की है और मुझे संतोष है कि हमने बहुत काम किया।”
- सहयोग का वादा: नई सरकार को मेरा पूरा समर्थन रहेगा ताकि बिहार निरंतर प्रगति करता रहे।
- उज्जवल भविष्य: “मुझे पूर्ण विश्वास है कि बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होगा।”
नीतीश कुमार के कार्यकाल की बड़ी विरासत
नीतीश कुमार जब विदा हो रहे हैं, तो उनके नाम कई ऐसे रिकॉर्ड और काम हैं जो सदियों तक याद रखे जाएंगे:
- सड़क और बिजली: बिहार के सुदूर गांवों तक बिजली और पक्की सड़कों का जाल।
- साइकिल योजना: जिसने बिहार की बेटियों की शिक्षा में क्रांति ला दी।
- सुशासन: ‘जंगलराज’ की छवि से बिहार को बाहर निकालकर निवेश के योग्य बनाना।
- सामाजिक सुधार: शराबबंदी और दहेज प्रथा के खिलाफ बड़े अभियान।
निष्कर्ष: एक मार्गदर्शक की भूमिका में ‘नीतीश’
नीतीश कुमार का इस्तीफा बिहार की राजनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। हालांकि वह अब मुख्यमंत्री नहीं हैं, लेकिन ‘सात निश्चय-3’ के जरिए उन्होंने 2030 तक का जो रोडमैप दिया है, वह आने वाली सरकार के लिए एक गाइडिंग लाइट का काम करेगा। बिहार की जनता के लिए नीतीश कुमार हमेशा उस नेता के रूप में याद किए जाएंगे जिन्होंने ‘बिहारी’ अस्मिता को पुनर्जीवित किया।



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