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Bihar Bridge Update: ₹4900 करोड़ की लागत वाला कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल तैयार, जानें कब से फर्राटा भरेंगी गाड़ियां?

​भूमिका
​बिहार में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचने जा रहा है। उत्तर और दक्षिण बिहार को जोड़ने वाली लाइफलाइन कही जाने वाली कच्ची दरगाह-बिदुपुर सिक्स लेन पुल परियोजना अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। गंगा नदी पर बन रहा यह महासेतु न केवल इंजीनियरिंग का एक बेजोड़ नमूना है, बल्कि यह बिहार की प्रगति की नई रफ्तार भी तय करेगा। नवीनतम अपडेट के अनुसार, इस पुल पर वाहनों का परिचालन जून 2026 के अंत तक शुरू होने की प्रबल संभावना है।
​निर्माण कार्य अंतिम चरण में: पाया संख्या-61 का काम पूरा
​परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने पुष्टि की है कि निर्माण कार्य युद्धस्तर पर जारी है। हाल ही में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए पाया संख्या-61 पर अंतिम सेगमेंट को सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया है। अब मुख्य फोकस फिनिशिंग, लाइटिंग और रेलिंग के कार्यों पर है। उम्मीद जताई जा रही है कि जून के आखिरी हफ्ते तक बिदुपुर की ओर से गाड़ियां दौड़ने लगेंगी, जिससे पटना और वैशाली के बीच का सफर मिनटों में सिमट जाएगा।
​क्यों खास है यह सिक्स लेन पुल?
​करीब 4988.4 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बन रहा यह पुल कई मायनों में ऐतिहासिक है:
​लंबाई: पूरे प्रोजेक्ट की कुल लंबाई 22.76 किलोमीटर है, जिसमें मुख्य पुल 9.76 किलोमीटर लंबा है।
​आधुनिक तकनीक: इसे ‘एक्स्ट्रा डोज्ड केबल स्टे’ डिजाइन पर बनाया गया है। यह तकनीक पुल को अधिक मजबूती और लंबा जीवन प्रदान करती है।
​रफ्तार: पुल की चौड़ाई 32 मीटर है, जिसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि वाहन 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सुरक्षित गुजर सकें।
​अंतरराष्ट्रीय सहयोग: इसका निर्माण एलएंडटी (L&T) और कोरियाई कंपनी देबू (Daewoo) के जाइंट वेंचर द्वारा किया जा रहा है।
​गांधी सेतु और जेपी सेतु पर कम होगा दबाव
​वर्तमान में पटना से उत्तर बिहार जाने के लिए महात्मा गांधी सेतु और जेपी सेतु मुख्य मार्ग हैं, जहाँ अक्सर ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती है। कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल के शुरू होने से:
​ट्रैफिक जाम से मुक्ति: वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा और मधुबनी जाने वाले यात्रियों को अब पटना शहर के भीतर घुसने की जरूरत नहीं होगी।
​सीधा संपर्क: यह पुल एनएच-30 (पटना) और एनएच-103 (बिदुपुर) को सीधे जोड़ेगा।
​राघोपुर का विकास: गंगा के बीच स्थित राघोपुर दियारा क्षेत्र के निवासियों के लिए यह पुल किसी वरदान से कम नहीं होगा, क्योंकि अब वे सीधे मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।
​प्रोजेक्ट की फंडिंग और इतिहास
​इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने लगभग 3000 करोड़ रुपये का कर्ज दिया है, जबकि शेष 2000 करोड़ रुपये राज्य सरकार वहन कर रही है। इस महासेतु का शिलान्यास 31 जनवरी 2016 को किया गया था। दिसंबर 2025 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने खुद स्थल निरीक्षण कर गुणवत्ता और समय सीमा का ध्यान रखने के कड़े निर्देश दिए थे।
​निष्कर्ष
​कच्ची दरगाह-बिदुपुर पुल का उद्घाटन बिहार के आर्थिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल समय और ईंधन की बचत होगी, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी। जून 2026 का इंतजार अब खत्म होने को है, जब बिहार को अपना एक और ‘आधुनिक गौरव’ मिलेगा।

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