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​नीतीश कुमार: बिहार की ‘पहचान’ और ‘आदत’ का अंत? 21 साल, 10 शपथ और एक अनूठा रिकॉर्ड

नीतीश कुमार: बिहार की ‘पहचान’ और ‘आदत’ का अंत? 21 साल, 10 शपथ और एक अनूठा रिकॉर्ड

​बिहार की राजनीति में पिछले दो दशकों से एक ही नाम गूँजता रहा है— नीतीश कुमार। 14 अप्रैल 2026 को जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया, तो यह केवल एक सरकार का अंत नहीं था, बल्कि एक युग का समापन जैसा महसूस हुआ। ‘बिहारी’ शब्द को सम्मान दिलाने से लेकर बिहार को ‘डर के साये’ से बाहर निकालने तक, नीतीश कुमार का सफर बेहद रोचक और उतार-चढ़ाव भरा रहा है।

शुरुआत: 7 दिन की पहली पारी और संघर्ष

​नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री बनने का सपना पहली बार 3 मार्च 2000 को पूरा हुआ था। हालांकि, संख्या बल की कमी के कारण वह महज 7 दिन ही कुर्सी पर टिक पाए। लेकिन इस हार ने उन्हें भविष्य के लिए और मजबूत कर दिया। 2005 में जब वह दोबारा सत्ता में लौटे, तो उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

नीतीश कुमार की 10 शपथों का सफर (2000-2026)

​नीतीश कुमार बिहार के इकलौते ऐसे नेता हैं जिन्होंने रिकॉर्ड 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। उनका सफर कुछ इस तरह रहा:

  • पहली बार (2000): केवल 7 दिन के लिए सीएम बने।
  • दूसरी बार (2005): एनडीए के साथ पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।
  • तीसरी बार (2010): विकास के नाम पर प्रचंड जीत हासिल की।
  • चौथी बार (2015): जीतनराम मांझी को हटाने के बाद दोबारा कमान संभाली।
  • पाँचवीं बार (2015): राजद और कांग्रेस के साथ ‘महागठबंधन’ बनाकर जीत दर्ज की।
  • छठी बार (2017): महागठबंधन छोड़ फिर से एनडीए में वापसी की।
  • सातवीं बार (2020): कम सीटें होने के बावजूद भाजपा के समर्थन से सीएम बने।
  • आठवीं बार (2022): एनडीए छोड़ फिर महागठबंधन में शामिल हुए।
  • नौवीं बार (2024): एक बार फिर पलटी मारी और एनडीए के साथ सरकार बनाई।
  • दसवीं बार (2025): विधानसभा चुनाव में जीत के बाद मुख्यमंत्री बने।

इस्तीफे की वजह: अब राज्यसभा का सफर

​14 अप्रैल 2026 को नीतीश कुमार का इस्तीफा कई मायनों में अलग है। इस बार उन्होंने किसी राजनीतिक कलह की वजह से नहीं, बल्कि राज्यसभा जाने के निर्णय के कारण पद छोड़ा है। विपक्ष का दावा है कि भाजपा ने उन्हें किनारे कर दिया है, जबकि जदयू इसे एक नई शुरुआत मान रही है।

नीतीश कुमार: निजी जीवन और परिवार

  • जन्म: 1 मार्च 1951, बख्तियारपुर (बिहार)।
  • शिक्षा: बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से मैकेनिकल इंजीनियरिंग।
  • परिवार: पत्नी मंजू कुमारी सिन्हा (निधन 2007)। बेटा निशांत कुमार, जिन्होंने हाल ही में राजनीति में कदम रखा है।
  • राजनीतिक गुरु: जय प्रकाश नारायण के जेपी आंदोलन से राजनीति की शुरुआत की।

‘सुशासन बाबू’ की बड़ी उपलब्धियाँ

  1. महिला सशक्तिकरण: पंचायतों में 50% आरक्षण और ‘साइकिल योजना’ ने बिहार की बेटियों की दुनिया बदल दी।
  2. सड़क और बिजली: ‘लालटेन युग’ से निकालकर बिहार के हर गांव को बिजली और पक्की सड़कों से जोड़ा।
  3. शराबबंदी: बिहार में सामाजिक बदलाव के लिए शराबबंदी जैसा साहसी कदम उठाया।
  4. बिहारी अस्मिता: विश्व मंच पर ‘बिहारी’ शब्द को गर्व का पर्याय बनाया।

विपक्ष का तंज और भविष्य की राजनीति

​तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं का मानना है कि 2025 के चुनाव में एनडीए का नारा “25 से 30 फिर से नीतीश” महज एक छलावा था। भाजपा अब बिहार में अपना मुख्यमंत्री चाहती है, यही वजह है कि नीतीश कुमार को दिल्ली की राजनीति की ओर मोड़ दिया गया है।

निष्कर्ष

​नीतीश कुमार बिहार के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्यमंत्री बन गए हैं। उन्होंने दिखाया कि कैसे लचीली राजनीति (Flexible Politics) के जरिए सत्ता के केंद्र में बने रहा जा सकता है। अब जब वह राज्यसभा जा रहे हैं, तो बिहार की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा होगा। क्या सम्राट चौधरी या भाजपा का कोई और चेहरा इस कमी को पूरा कर पाएगा? यह तो वक्त ही बताएगा।

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