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नीतीश कुमार की विरासत संभालेंगे बेटे निशांत कुमार? मंत्री पद की शपथ के बाद अब इस ‘खास’ कुर्सी पर नजर

पटना। बिहार की राजनीति में गुरुवार का दिन एक नए युग की शुरुआत का गवाह बना। जनता दल यूनाइटेड (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इकलौते बेटे निशांत कुमार ने मंत्री पद की शपथ लेकर सक्रिय राजनीति में औपचारिक कदम रख दिया है। कभी राजनीति से दूर रहने वाले निशांत अब न केवल सरकार का हिस्सा हैं, बल्कि भविष्य में अपने पिता की राजनीतिक विरासत के सबसे बड़े उत्तराधिकारी के रूप में देखे जा रहे हैं।

​1. पिता के साथ मंच पर पहली बार आए नजर

​निशांत कुमार और नीतीश कुमार के बीच के सार्वजनिक संबंध हमेशा से बेहद निजी रहे हैं। मुख्यमंत्री आवास में रहने के बावजूद दोनों को सार्वजनिक मंचों पर एक साथ बहुत कम देखा गया। यहाँ तक कि जब निशांत की जेडीयू में एंट्री हुई या उन्होंने अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की, तब भी नीतीश कुमार मंच पर मौजूद नहीं थे।

​लेकिन गुरुवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में नजारा बदला हुआ था। शपथ ग्रहण समारोह के दौरान नीतीश कुमार न केवल मंच पर मौजूद थे, बल्कि अपने बेटे को आशीर्वाद देते समय उनके चेहरे पर एक पिता का संतोष और गर्व साफ झलक रहा था।

​2. विधान परिषद की वो ‘खाली’ कुर्सी और मजबूरी

​निशांत कुमार ने मंत्री पद की शपथ तो ले ली है, लेकिन वह वर्तमान में बिहार विधानमंडल के किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) के सदस्य नहीं हैं। संवैधानिक नियमों के अनुसार, उन्हें छह महीने के भीतर सदस्यता लेनी अनिवार्य है।

​राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है कि निशांत कुमार को नीतीश कुमार द्वारा खाली की गई विधान परिषद (MLC) की सीट से सदन में भेजा जाएगा। यह उनके लिए ‘जरूरी’ भी है और राजनीतिक ‘मजबूरी’ भी, क्योंकि इसी रास्ते से वह अपनी कैबिनेट की सीट सुरक्षित रख पाएंगे।

​3. कौन हैं निशांत कुमार? (व्यक्तिगत पहचान)

​निशांत कुमार ने अपनी शुरुआती पहचान एक शांत और राजनीति से विमुख रहने वाले व्यक्ति के रूप में बनाई थी, लेकिन अब वह मुख्यधारा के नेता हैं।

  • शिक्षा: अपने पिता की तरह निशांत ने भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है।
  • निवासी: मूल रूप से नालंदा से ताल्लुक रखने वाले निशांत कागजों पर पटना जिले के निवासी हैं। जातीय जनगणना के दौरान उन्हें अपने पिता के साथ बख्तियारपुर में देखा गया था, जबकि उनका वोटर कार्ड पटना शहर का है।
  • सादा जीवन: निशांत अब तक अविवाहित हैं और उन्होंने हमेशा चकाचौंध से दूर एक सरल जीवन जीने को प्राथमिकता दी है।

​4. ‘परिवारवाद’ के आरोपों के बीच नई चुनौती

​नीतीश कुमार ने अपने पूरे राजनीतिक करियर में परिवारवाद के खिलाफ कड़ा स्टैंड लिया है। लेकिन निशांत कुमार के मंत्री बनने के बाद विपक्ष एक बार फिर ‘परिवारवाद’ के मुद्दे पर हमलावर है। हालांकि, जेडीयू समर्थकों का तर्क है कि निशांत अपनी योग्यता और युवाओं के बीच बढ़ती लोकप्रियता के कारण इस पद के हकदार हैं।

​5. अगला पड़ाव: क्या होगा भविष्य?

​मंत्री बनने के बाद निशांत कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद को एक कुशल प्रशासक के रूप में साबित करने की है। क्या वह नीतीश कुमार की तरह बिहार की राजनीति में अपनी अमिट छाप छोड़ पाएंगे? क्या वह जेडीयू के अगले निर्विवाद नेता बनेंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले छह महीनों में उनकी कार्यशैली और चुनावी रणनीतियों से स्पष्ट होंगे।

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