गया मेडिकल कॉलेज में संकट: गैस खत्म, अब 600 मरीजों का खाना लकड़ी-कोयले पर; अंतरराष्ट्रीय तनाव का असर!
गया, 22 मार्च 2026: बिहार के गया जिले से एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। मगध क्षेत्र के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज सह अस्पताल (ANMMCH) में इन दिनों रसोई व्यवस्था पटरी से उतर गई है। कमर्शियल LPG गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत के कारण अस्पताल प्रशासन और रसोई कर्मियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। हालात इतने खराब हैं कि अब रोजाना करीब 600 मरीजों का भोजन पारंपरिक तरीके से लकड़ी और कोयले के चूल्हे पर बनाया जा रहा है।
ईरान-इजरायल तनाव का ‘गया’ कनेक्शन?
हैरानी की बात यह है कि इस स्थानीय संकट के तार अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े बताए जा रहे हैं। वैश्विक स्तर पर ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण कमर्शियल गैस की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई है। सप्लायरों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता के चलते भारत के कई हिस्सों में LPG की आपूर्ति बाधित हुई है। गया के सप्लायरों ने अस्पताल को सिलेंडर देने से हाथ खड़े कर दिए हैं, और जो उपलब्ध हैं, उनकी कीमतें आसमान छू रही हैं।
जीविका दीदियों की बढ़ी मुश्किलें: आधुनिक रसोई से ‘धुएं’ तक का सफर
अस्पताल की कैंटीन का संचालन ‘जीविका समूह’ की महिलाओं द्वारा किया जाता है। आधुनिक गैस चूल्हों पर खाना बनाने की आदी हो चुकीं इन महिलाओं के लिए अब कोयले और लकड़ी का प्रबंधन करना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है।
- काम का बोझ: जीविका दीदी पारो देवी ने बताया कि गैस पर काम जल्दी और सफाई से होता था। अब लकड़ी के चूल्हे पर घंटों समय बर्बाद होता है।
- स्वास्थ्य और सफाई: कैंटीन मैनेजर मनीष दीपक के अनुसार, कोयले के चूल्हे से निकलने वाले धुएं से स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। साथ ही, बर्तनों पर जमी काली कालिख को साफ करने में अतिरिक्त मेहनत और समय लग रहा है।
- सीमित संसाधनों का खेल: फिलहाल स्थिति इतनी विकट है कि गैस का उपयोग केवल ‘रोटी’ बनाने के लिए बचाया जा रहा है, जबकि दाल, चावल और सब्जियां पूरी तरह से लकड़ी-कोयले के भरोसे हैं।
अस्पताल व्यवस्था पर उठते सवाल
इतने बड़े मेडिकल संस्थान में इस तरह की बुनियादी कमी प्रबंधन पर सवालिया निशान लगाती है। जहाँ एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को हाई-टेक बनाने का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर 600 मरीजों के भोजन के लिए आदिम तरीकों का सहारा लेना पड़ रहा है।
मुख्य चुनौतियां:
- समय प्रबंधन: लकड़ी पर खाना बनने में गैस की तुलना में दोगुना समय लग रहा है।
- लागत: महंगे सिलेंडर और लकड़ी-कोयले का अतिरिक्त खर्च बजट बिगाड़ रहा है।
- हाइजीन: धुएं और कालिख के बीच मरीजों के लिए स्वच्छ भोजन तैयार करना कठिन होता जा रहा है।
निष्कर्ष
गया मेडिकल कॉलेज की यह तस्वीर शासन और प्रशासन के लिए एक चेतावनी है। यदि समय रहते गैस आपूर्ति बहाल नहीं की गई, तो रसोई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है, जिसका सीधा असर मरीजों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। संबंधित विभाग को चाहिए कि वे इस संकट को गंभीरता से लें और वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित करें।

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