बिहार में बेटियाँ असुरक्षित! सांसद पप्पू यादव का पुलिस पर तीखा हमला; डगरूआ कांड को लेकर उठाए गंभीर सवाल
पूर्णिया, 22 मार्च 2026: बिहार में महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर सियासत गरमा गई है। पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने अर्जुन भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राज्य की कानून व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने विशेष रूप से डगरूआ प्रखंड में हुई एक नाबालिग बच्ची की हत्या और कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े किए हैं।
सांसद ने अत्यंत भावुक और आक्रामक तेवर अपनाते हुए कहा कि बिहार में बेटियाँ अब सुरक्षित नहीं रह गई हैं और प्रशासन संवेदनहीनता की पराकाष्ठा पार कर चुका है।
डगरूआ कांड: पुलिस की लापरवाही या मिलीभगत?
पप्पू यादव ने डगरूआ की घटना का विवरण देते हुए बताया कि एक मासूम बच्ची का 11 मार्च को अपहरण किया गया था। पुलिस की सुस्ती का आलम यह रहा कि 10 दिनों बाद यानी 20 मार्च को बच्ची का शव बरामद हुआ। सांसद ने आरोप लगाया कि अपराधियों ने न केवल बच्ची के साथ दरिंदगी की, बल्कि पहचान मिटाने के लिए उसके शरीर पर एसिड (तेजाब) डाल दिया ताकि साक्ष्य नष्ट हो सकें।
उन्होंने पुलिस से सीधा सवाल किया, “11 दिनों तक प्रशासन क्या कर रहा था? क्या अगर समय पर कार्रवाई होती, तो उस मासूम की जान नहीं बचाई जा सकती थी?”
“प्रेम प्रसंग” की थ्योरी पर भड़के सांसद
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पप्पू यादव ने पुलिस द्वारा मामलों को दबाने के तरीके पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जब भी कोई बच्ची गायब होती है, पुलिस बिना जांच किए उसे ‘प्रेम प्रसंग’ का नाम दे देती है।
”पटना से लेकर दरभंगा तक, कई थाना प्रभारी बच्चियों के लापता होने पर ‘मौज-मस्ती’ जैसे शर्मनाक शब्दों का इस्तेमाल करते हैं। यह पीड़ित परिवार के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है।” – पप्पू यादव
नीट छात्रा मामला और सफेदपोशों के चेहरे बेनकाब करने की मांग
सांसद ने केवल डगरूआ ही नहीं, बल्कि एक नीट (NEET) छात्रा से जुड़े संदिग्ध मामले को भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक हॉस्टल संचालक के संरक्षण में अनैतिक गतिविधियां चल रही थीं। पप्पू यादव ने मांग की है कि:
- मुख्य आरोपी मनीष के मोबाइल लोकेशन और कॉल डिटेल्स की उच्च स्तरीय जांच हो।
- हॉस्टल में रह रही अन्य लड़कियों की पृष्ठभूमि की जांच की जाए कि वे कहाँ से आई थीं।
- इस पूरे नेटवर्क के पीछे छिपे ‘सफेदपोश’ लोगों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।
समाज से अपील: खुद करें अपनी बेटियों की सुरक्षा
सरकारी व्यवस्था से निराश होकर सांसद ने बिहार के हर परिवार से एक मार्मिक अपील की है। उन्होंने कहा कि समाज में ‘गिद्ध दृष्टि’ रखने वालों की कमी नहीं है, चाहे वह पड़ोसी हो, हॉस्टल संचालक हो या कोचिंग संस्थान। उन्होंने अभिभावकों से कहा कि वे अपनी बेटियों की सुरक्षा के प्रति खुद सजग रहें क्योंकि वर्तमान सिस्टम विफल नजर आ रहा है।
सांसद की प्रमुख मांगें:
- जिस थाना क्षेत्र में अपहरण हो, वहां के थाना प्रभारी (SHO) की जवाबदेही तय की जाए।
- लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई हो।
- पूर्णिया आईजी इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग खुद करें।
निष्कर्ष
पप्पू यादव का यह हमला नीतीश सरकार के ‘सुशासन’ के दावों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। डगरूआ की घटना ने एक बार फिर बिहार में महिला सुरक्षा के दावों की पोल खोल दी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इन आरोपों पर क्या सफाई देता है और दोषियों को कब तक सजा मिलती है।



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