बिहार: कर्ज के बोझ और प्रताड़ना ने ली महिला की जान; माइक्रो फाइनेंस कंपनी के दो कर्मी गिरफ्तार
बिहार के वैशाली जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ वित्तीय संस्थानों की कथित संवेदनहीनता और प्रताड़ना ने एक हँसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया। जिले के गोरौल थाना क्षेत्र के राजखंड गांव में एक महिला ने माइक्रो फाइनेंस कंपनी के कर्मियों द्वारा किए जा रहे मानसिक उत्पीड़न से तंग आकर आत्मघाती कदम उठा लिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में आक्रोश का माहौल है।
क्या है पूरा मामला?
मृतका की पहचान 30 वर्षीय दुर्गा देवी के रूप में हुई है, जो पवन महतो की पत्नी थीं। जानकारी के अनुसार, दुर्गा देवी ने अपनी घरेलू जरूरतों या किसी कार्य के लिए ‘कैशपा माइक्रो क्रेडिट फाइनेंस’ से करीब एक लाख रुपये का ऋण (लोन) लिया था। परिजनों का आरोप है कि पिछले कुछ समय से लोन की किश्तें चुकाने को लेकर कंपनी के कर्मी उन्हें लगातार मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे।
परिजनों ने पुलिस को बताया कि फाइनेंस कंपनी के कर्मी न केवल घर आकर हंगामा करते थे, बल्कि उन्होंने दुर्गा देवी का मोबाइल फोन और घर का कुछ सामान भी छीन लिया था।
“मर जाओ तो कर्ज माफ हो जाएगा” – रोंगटे खड़े कर देने वाला आरोप
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला और दुखद पहलू मृतका की मां के बयानों से सामने आया है। उन्होंने आरोप लगाया कि फाइनेंस कंपनी के कर्मियों और समूह की कुछ महिलाओं ने दुर्गा देवी से बेहद क्रूर बात कही थी। आरोपों के अनुसार, उनसे कहा गया था, “तुम फांसी लगाकर मर जाओ, तो तुम्हारा सारा कर्ज माफ कर दिया जाएगा।” इस तरह की संवेदनहीन टिप्पणियों और लगातार मिल रही धमकियों ने महिला को मानसिक रूप से तोड़ दिया।
परिजनों का बुरा हाल, पति पटना में करता है काम
घटना के समय दुर्गा देवी के पति पवन महतो पटना में थे, जहाँ वे सब्जी बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। घर पर दुर्गा देवी अपने चार छोटे बच्चों (दो बेटियां और दो बेटे) के साथ रहती थीं। मां की मौत के बाद बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में मातम छाया हुआ है।
ग्रामीणों का गुस्सा और पुलिस की कार्रवाई
घटना की खबर फैलते ही ग्रामीण उग्र हो गए। उन्होंने मौके पर मौजूद एक फाइनेंस कर्मी की जमकर पिटाई कर दी। सूचना मिलते ही गोरौल थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
थानाध्यक्ष सुनील कुमार के अनुसार, मृतका की मां के बयान पर कुल सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो बैंक कर्मियों को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही, परिवार के अन्य सदस्यों (पति, सास, ससुर) की भूमिका की भी गहनता से जांच की जा रही है। एफएसएल (FSL) की टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं।
निष्कर्ष
यह घटना माइक्रो फाइनेंस कंपनियों की कार्यशैली और ऋण वसूली के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। रिजर्व बैंक के स्पष्ट दिशा-निर्देशों के बावजूद, ग्रामीण इलाकों में वसूली के लिए मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के मामले अक्सर सामने आते रहते हैं। प्रशासन को इस दिशा में कड़े कदम उठाने की आवश्यकता है ताकि फिर कोई ‘दुर्गा’ इस तरह का कदम न उठाए।



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