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इंदौर अग्निकांड: किशनगंज में एक साथ उठीं 6 अर्थियां, आखिरी बार चेहरा भी नहीं देख पाए परिजन; सिसकियों से गूंजा शहर

किशनगंज: नियति का क्रूर प्रहार जब होता है, तो वह पीछे सिर्फ यादें और कभी न खत्म होने वाला दर्द छोड़ जाता है। मध्य प्रदेश के इंदौर में हुए भीषण अग्निकांड ने बिहार के किशनगंज के एक प्रतिष्ठित परिवार को ऐसा ही जख्म दिया है। शुक्रवार को जब किशनगंज की सड़कों पर ‘तीया’ (मृत्यु के पश्चात की रस्म) के लिए मौन जुलूस निकला, तो पत्थर दिल इंसान की आंखें भी नम हो गईं। धर्मशाला रोड से गांधी घाट तक सिर्फ सिसकियों की आवाज सुनाई दे रही थी।

एक ही झटके में उजड़ गई तीन पीढ़ियां

​बुधवार तड़के इंदौर में लगी आग ने किशनगंज के सेठिया परिवार के छह चिरागों को हमेशा के लिए बुझा दिया। इस हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परिवार की तीन पीढ़ियां—दादा-दादी से लेकर मासूम पोते-पोतियों तक—इस त्रासदी की भेंट चढ़ गईं। मरने वालों में विजय सेठिया (65), सुमन सेठिया (60), छोटू सेठिया (22), राशि सेठिया (12), टीनू सेठिया (35) और 8 साल का नन्हा तनय शामिल थे।

अंतिम दर्शन का मलाल ताउम्र रहेगा

​परिजनों के लिए सबसे बड़ा दुख यह रहा कि वे अपने प्रियजनों का अंतिम बार चेहरा भी नहीं देख सके। आग इतनी भीषण थी कि शव बुरी तरह झुलस गए थे। जब तक परिजन किशनगंज से बदहवास होकर इंदौर पहुंचे, तब तक प्रशासन और वहां मौजूद रिश्तेदारों को स्थिति को देखते हुए अंतिम संस्कार करना पड़ा था।

​मृतक कार्तिक की मां मैहर सेठिया के शब्द वहां मौजूद हर व्यक्ति के कलेजे को चीर रहे थे— “मेरा भाग्य इतना फूटा था कि मैं अपने बेटे का आखिरी बार दीदार भी न कर सकी। वह मुस्कुराते हुए गया था, पर लौटकर सिर्फ उसकी राख की खबर आई।”

कैसे हुआ यह हृदयविदारक हादसा?

​जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी भी आधुनिक सुरक्षा तंत्र पर सवाल खड़े करते हैं। इंदौर के ब्रजेश्वर कॉलोनी में स्थित मकान में आग संभवतः इलेक्ट्रिक कार की चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट से लगी थी।

  • सिलेंडर ब्लास्ट: कार से शुरू हुई आग ने घर के अंदर रखे गैस सिलेंडरों को अपनी चपेट में ले लिया। एक के बाद एक धमाकों से मकान का एक हिस्सा ढह गया।
  • डिजिटल लॉक बना काल: घर में लगे आधुनिक ‘डिजिटल लॉक’ बिजली कटने या तकनीकी खराबी के कारण जाम हो गए। अंदर सो रहे लोगों को बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला और वे अंदर ही फंस गए।

किशनगंज में पसरा मातम, मौन जुलूस में उमड़ा जनसैलाब

​शुक्रवार सुबह किशनगंज के धर्मशाला रोड स्थित आवास से गांधी घाट के शिव मंदिर तक निकाले गए मौन जुलूस में पूरा शहर शामिल हुआ। व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे और लोगों ने नम आंखों से दिवंगतों को श्रद्धांजलि दी। स्थानीय निवासियों का कहना है कि किशनगंज ने अपने इतिहास में इतनी बड़ी और दर्दनाक सामूहिक विदाई पहले कभी नहीं देखी थी।

निष्कर्ष और सुरक्षा की सीख

​यह हादसा हमें चेतावनी देता है कि घर में इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग और आधुनिक डिजिटल सुरक्षा उपकरणों का उपयोग करते समय इमरजेंसी एग्जिट (आपातकालीन निकास) की व्यवस्था कितनी अनिवार्य है। किशनगंज के सेठिया परिवार का यह दुख अब पूरे समाज का दुख बन चुका है।

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