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बिहार: सीएम नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ में बड़ी सुरक्षा चूक, नालंदा में काफिले के सामने आई बच्ची, महिला कांस्टेबल ने बचाई जान

नालंदा: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गुरुवार को अपने गृह जिले नालंदा के दौरे पर थे। अपनी महत्वाकांक्षी ‘समृद्धि यात्रा’ के तहत वे जिले को करोड़ों की योजनाओं की सौगात देने पहुंचे थे। लेकिन इस दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता दावों की पोल खोलकर रख दी। बिहार शरीफ के भैंसासुर मंदिर के पास मुख्यमंत्री के हाई-प्रोफाइल काफिले के बीच अचानक एक छोटी बच्ची के आ जाने से मौके पर मौजूद अधिकारियों और सुरक्षाकर्मियों के हाथ-पांव फूल गए।

महिला कांस्टेबल बनी ‘देवदूत’

​प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मुख्यमंत्री का काफिला अपनी निर्धारित गति से फ्लाईओवर के उद्घाटन की ओर बढ़ रहा था। तभी अचानक भीड़ से निकलकर एक मासूम बच्ची सड़क के बीचो-बीच आ गई। गाड़ियों की रफ्तार और सुरक्षा घेरे के बीच बच्ची को देख वहां मौजूद लोग चीख पड़े। गनीमत यह रही कि मौके पर तैनात एक महिला कांस्टेबल ने बिजली जैसी फुर्ती दिखाई और अपनी जान की परवाह किए बिना दौड़कर बच्ची को सुरक्षित घेरे से बाहर खींच लिया। अगर कुछ सेकंड की भी देरी होती, तो एक बड़ा हादसा हो सकता था।

810 करोड़ की योजनाओं का तोहफा और सुरक्षा पर सवाल

​मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का हेलीकॉप्टर सबसे पहले नालंदा कॉलेज के मैदान में लैंड हुआ। वहां से कड़ी सुरक्षा के बीच वे सड़क मार्ग से आगे बढ़े। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य जिले के विकास को गति देना था। मुख्यमंत्री ने नालंदा के लिए 810 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया।

​हालांकि, इन विकास कार्यों की चर्चा से ज्यादा इस ‘सुरक्षा चूक’ की चर्चा हो रही है। वीवीआईपी (VVIP) मूवमेंट के दौरान सड़क के दोनों ओर बैरिकेडिंग और पुलिस बल की भारी तैनाती के बावजूद, एक बच्ची का सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे मुख्यमंत्री की गाड़ी के पास पहुंच जाना प्रशासनिक लापरवाही की ओर इशारा करता है।

फ्लाईओवर का उद्घाटन और समृद्धि यात्रा का लक्ष्य

​इस मामूली व्यवधान और हड़कंप के बाद स्थिति को नियंत्रित किया गया और मुख्यमंत्री का काफिला आगे बढ़ा। नीतीश कुमार ने नव-निर्मित फ्लाईओवर का फीता काटकर विधिवत उद्घाटन किया। इस मौके पर उनके साथ मंत्रिमंडल के कई वरिष्ठ सदस्य और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।

​नीतीश कुमार की यह ‘समृद्धि यात्रा’ आगामी विधानसभा चुनावों से पहले जनता के बीच जाकर सरकारी योजनाओं का फीडबैक लेने और विकास कार्यों को जमीन पर उतारने की एक बड़ी कवायद मानी जा रही है। लेकिन नालंदा जैसी संवेदनशील जगह पर, जो मुख्यमंत्री का अपना गढ़ है, वहां ऐसी चूक विपक्षी दलों को सरकार पर हमला करने का मौका दे सकती है।

सुरक्षा प्रोटोकॉल पर उठ रहे गंभीर सवाल

​यह पहली बार नहीं है जब मुख्यमंत्री की सुरक्षा में इस तरह की सेंध लगी हो। इससे पहले भी कई बार सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा घेरे के उल्लंघन के मामले सामने आए हैं। नालंदा की घटना के बाद स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन अब इस बात की जांच कर रहा है कि आखिर चूक कहां हुई।

  • ​क्या सुरक्षा घेरे में तैनात जवानों की संख्या कम थी?
  • ​क्या भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पर्याप्त बैरिकेडिंग नहीं की गई थी?
  • ​भीड़भाड़ वाले इलाकों में मूवमेंट के दौरान क्या अतिरिक्त सावधानी नहीं बरती गई?

​स्थानीय लोगों का कहना है कि सुरक्षाकर्मी वीवीआईपी को सुरक्षित निकालने में इतने व्यस्त थे कि सड़क किनारे खड़ी आम जनता और बच्चों की गतिविधियों पर उनका ध्यान कम था।

निष्कर्ष

​मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा निश्चित रूप से नालंदा के विकास के लिए एक मील का पत्थर है, लेकिन सुरक्षा में हुई यह चूक प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। महिला कांस्टेबल की सतर्कता ने सरकार को एक बड़ी किरकिरी और दुखद घटना से बचा लिया। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में गृह विभाग इस घटना से सबक लेकर मुख्यमंत्री की सुरक्षा को और कितना अभेद्य बनाता है।

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