बिहार: नालंदा में भ्रष्टाचार पर ‘हथौड़ा’, एक हफ्ते में दूसरी बड़ी कार्रवाई; आशा बहाली के नाम पर घूस लेते BCM गिरफ्तार
नालंदा: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही “जीरो टॉलरेंस” की नीति के तहत निगरानी विभाग (Vigilance Department) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। मुख्यमंत्री के गृह जिले नालंदा में एक हफ्ते के भीतर भ्रष्टाचार का यह दूसरा बड़ा मामला सामने आया है। गुरुवार को पटना से आई निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की टीम ने नगरनौसा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में तैनात बीसीएम (ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर) मनजीत कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
आशा बहाली के नाम पर ‘सौदा’
भ्रष्टाचार का यह खेल स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली ‘आशा कार्यकर्ताओं’ की बहाली से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, नगरनौसा PHC के बीसीएम मनजीत कुमार ने एक पीड़िता, बॉबी कुमारी से आशा कार्यकर्ता के पद पर चयन और बहाली की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के एवज में 25 हजार रुपये की मांग की थी।
पीड़िता बॉबी कुमारी ने इस अवैध मांग के आगे झुकने के बजाय भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने का फैसला किया। उन्होंने पटना स्थित निगरानी विभाग के मुख्यालय में जाकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गोपनीय तरीके से शिकायत का सत्यापन कराया। जब यह पुष्टि हो गई कि बीसीएम वास्तव में रिश्वत की मांग कर रहा है, तो विभाग ने उसे रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक जाल बिछाया।
निगरानी टीम का ‘ट्रैप’ और गिरफ्तारी
गुरुवार दोपहर को योजना के अनुसार, बॉबी कुमारी रिश्वत की पहली किस्त के रूप में 10 हजार रुपये लेकर नगरनौसा स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं। जैसे ही उन्होंने यह रकम मनजीत कुमार के हाथों में थमाई, सादे लिबास में तैनात निगरानी टीम के सदस्यों ने उसे चारों तरफ से घेर लिया।
अचानक हुई इस कार्रवाई से स्वास्थ्य केंद्र परिसर में हड़कंप मच गया। टीम ने मनजीत के पास से रिश्वत के पैसे बरामद किए और उसके हाथों को केमिकल से धुलवाया, जिससे रिश्वत लेने की वैज्ञानिक पुष्टि हो सके। गिरफ्तारी के तुरंत बाद टीम आरोपी को अपने वाहन में बैठाकर पटना ले गई, जहाँ उससे सघन पूछताछ की जा रही है।
एक हफ्ते में दूसरी बड़ी कार्रवाई: अधिकारियों में खौफ
नगरनौसा ब्लॉक इन दिनों निगरानी विभाग के रडार पर है। दिलचस्प और चिंताजनक बात यह है कि इसी इलाके में एक हफ्ते के भीतर यह दूसरी बड़ी गिरफ्तारी है। इससे पहले, 20 मार्च 2026 को निगरानी टीम ने नगरनौसा के बीपीआरओ (BPRO) को 12 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया था।
लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने जिले के प्रशासनिक महकमे में हलचल पैदा कर दी है। यह स्पष्ट हो गया है कि निचले स्तर के अधिकारी और कर्मचारी अब भी पुराने ढर्रे पर काम कर रहे हैं और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के नाम पर आम जनता का शोषण कर रहे हैं।
भ्रष्टाचार मुक्त बिहार का संकल्प?
निगरानी विभाग की इस तत्परता ने आम आदमी के विश्वास को मजबूत किया है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी खड़ा किया है कि आखिर सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं। आशा कार्यकर्ताओं की बहाली जैसी बुनियादी प्रक्रिया में भी अगर हजारों रुपये की मांग की जा रही है, तो अन्य बड़े प्रोजेक्ट्स की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि निगरानी विभाग को ऐसी ही कार्रवाई ब्लॉक स्तर के अन्य विभागों में भी करनी चाहिए, जहाँ बिना ‘सुविधा शुल्क’ के कोई फाइल आगे नहीं बढ़ती।
निष्कर्ष
नालंदा में बीसीएम की गिरफ्तारी शासन और प्रशासन के लिए एक कड़ा संदेश है। भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की यह मुहिम न केवल भ्रष्ट अधिकारियों के मन में डर पैदा करेगी, बल्कि जनता को भी यह संदेश देगी कि वे गलत के खिलाफ आवाज उठाएं। आरोपी मनजीत कुमार पर अब कानूनी शिकंजा कसना तय है, और उसे जल्द ही विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।



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