Loading Now

जेडीयू में मची रार: सांसद गिरधारी यादव पर गिरी गाज, पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में सदस्यता रद्द करने की मांग

पटना/दिल्ली। बिहार की सत्ताधारी पार्टी जनता दल यूनाइटेड (JDU) में आंतरिक कलह अब चरम पर पहुंच गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली पार्टी ने बांका से अपने सांसद गिरधारी यादव के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उनकी लोकसभा सदस्यता समाप्त करने के लिए अयोग्यता का नोटिस (Disqualification Notice) सौंपा है। जदयू के इस कदम ने बिहार की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।

क्या है पूरा मामला?

​लोकसभा में जदयू के संसदीय दल के नेता दिलेश्वर कामत ने आधिकारिक तौर पर लोकसभा अध्यक्ष (Speaker) को पत्र लिखकर गिरधारी यादव की सदस्यता रद्द करने की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि गिरधारी यादव लंबे समय से दल-विरोधी गतिविधियों में शामिल रहे हैं और उन्होंने पार्टी लाइन से हटकर काम किया है।

बेटे का आरजेडी से चुनाव लड़ना बना मुख्य कारण

​इस विवाद की जड़ें हालिया विधानसभा चुनावों से जुड़ी हैं। आरोप है कि गिरधारी यादव के बेटे चाणक्य प्रकाश चुनाव से ठीक पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) में शामिल हो गए और बेलहर विधानसभा सीट से जदयू के आधिकारिक प्रत्याशी मनोज यादव के खिलाफ चुनाव लड़ा।

  • आरोप: जदयू का दावा है कि गिरधारी यादव ने न केवल अपने बेटे को विपक्षी दल से टिकट दिलवाया, बल्कि गुप्त रूप से उनके लिए प्रचार भी किया।
  • नतीजा: हालांकि इस चुनाव में चाणक्य प्रकाश की हार हुई, लेकिन पार्टी आलाकमान ने इसे ‘गद्दारी’ और ‘अनुशासनहीनता’ के रूप में देखा।

ललन सिंह का कड़ा रुख: “फैसला तथ्यों पर आधारित”

​इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री और जदयू के दिग्गज नेता राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय व्यक्तिगत द्वेष में नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा, “यह फैसला उन लोगों की ओर से लिया गया है जिन्होंने अपने बेटे को आरजेडी के टिकट पर उतारा और खुद उसके लिए प्रचार किया। हमारे संसदीय नेता ने साक्ष्यों के आधार पर आवेदन दिया है। अब अंतिम फैसला स्पीकर को करना है।”

गिरधारी यादव की सफाई और राजद का बचाव

​वहीं, सांसद गिरधारी यादव ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा, “मेरे खिलाफ दल-विरोधी गतिविधि का कोई रिकॉर्ड नहीं है। जब लोकसभा अध्यक्ष मुझसे इस बारे में पूछेंगे, तो मैं विस्तार से जवाब दूंगा।”

​दूसरी ओर, विपक्षी दल आरजेडी ने इस कार्रवाई को ‘तानाशाही’ करार दिया है। राजद सांसद मीसा भारती ने सवाल उठाते हुए कहा कि गिरधारी यादव के बेटे वयस्क हैं और अपना राजनीतिक फैसला लेने के लिए स्वतंत्र हैं। बेटे के फैसले की सजा पिता को देना न्यायसंगत नहीं है।

आगे क्या होगा?

​अब गेंद लोकसभा अध्यक्ष के पाले में है। यदि स्पीकर को जदयू द्वारा दिए गए साक्ष्य पर्याप्त लगते हैं, तो गिरधारी यादव की सदस्यता पर खतरा मंडरा सकता है। बिहार की राजनीति के विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार इस कार्रवाई के जरिए पार्टी के अन्य नेताओं को कड़ा संदेश देना चाहते हैं कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

मुख्य अपडेट्स एक नजर में:

विवरणजानकारी
नामगिरधारी यादव (सांसद, बांका)
कार्रवाईसदस्यता रद्द करने हेतु स्पीकर को नोटिस
मुख्य आरोपबेटे के लिए विपक्षी दल (RJD) में प्रचार करना
शिकायतकर्तादिलेश्वर कामत (जदयू संसदीय दल नेता)

Previous post

​पटना: तीन लोगों के लिए ‘देवदूत’ बना युवक खुद को नहीं बचा पाया, गंगा की लहरों में समाई वीरता; छठ घाट पर पसरा मातम

Next post

बिहार: सीएम नीतीश कुमार की ‘समृद्धि यात्रा’ में बड़ी सुरक्षा चूक, नालंदा में काफिले के सामने आई बच्ची, महिला कांस्टेबल ने बचाई जान

Post Comment

You May Have Missed