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पूर्णिया में तालिबानी सजा: चोरी के शक में युवक को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा, पुलिस ने चंगुल से छुड़ाकर बचाई जान

पूर्णिया, बिहार: बिहार के पूर्णिया जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक घटना सामने आई है। यहाँ अमौर थाना क्षेत्र के खमेला गांव में भीड़ ने ‘कंगारू कोर्ट’ लगाते हुए एक युवक को चोरी के आरोप में मौत के मुहाने तक पहुँचा दिया। ग्रामीणों ने न केवल युवक को बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा, बल्कि मौके पर पहुँची पुलिस टीम को भी उसे सौंपने से इनकार कर दिया।

रस्सी से बांधकर रातभर किया टॉर्चर

​घटना की शुरुआत शुक्रवार रात को हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि 23 वर्षीय जितेंद्र कुमार साह चोरी की नीयत से घर में घुसा था। आक्रोशित भीड़ ने जितेंद्र को पकड़कर उसके हाथ-पैर रस्सी से बांध दिए। उसे चीखने से रोकने के लिए मुँह में कपड़ा ठूंस दिया गया और फिर लाठी-डंडों से उसकी पिटाई शुरू हुई। बताया जा रहा है कि हमलावरों ने युवक के नाजुक अंगों पर भी वार किए, जिससे उसकी हालत अत्यंत नाजुक हो गई।

जब पुलिस को खाली हाथ लौटना पड़ा

​हैरानी की बात यह है कि सूचना मिलने पर जब अमौर थाना पुलिस की एक छोटी टीम मौके पर पहुँची, तो ग्रामीणों ने कानून को ठेंगे पर रख दिया। उग्र भीड़ ने युवक को पुलिस के हवाले करने से साफ मना कर दिया और कहा कि वे इसका फैसला खुद करेंगे। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को एक बार पीछे हटना पड़ा।

पुलिस का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन

​शनिवार की सुबह थानाध्यक्ष अवधेश कुमार भारी पुलिस बल के साथ दोबारा खमेला गांव पहुँचे। पुलिस की सख्ती के बाद जितेंद्र को ग्रामीणों के चंगुल से मुक्त कराया गया। उसे तत्काल अमौर रेफरल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए पूर्णिया जीएमसीएच (GMCH) रेफर कर दिया गया। फिलहाल जितेंद्र जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है।

परिजनों का आरोप: “पुरानी रंजिश में बनाया निशाना”

​पीड़ित की माँ, मीरा देवी ने पुलिस को दिए आवेदन में एक अलग कहानी बयां की है। उनका आरोप है कि यह चोरी का मामला नहीं बल्कि पुरानी रंजिश का परिणाम है। उनके अनुसार, जितेंद्र रात को अपनी दुकान बढ़ाकर घर लौट रहा था, तभी मुख्य आरोपी राज कुमार ठाकुर और अन्य लोगों ने उसे अगवा कर लिया और झूठे आरोप में उसे अधमरा कर दिया। पुलिस ने इस मामले में 13 नामजद और 20 अज्ञात लोगों पर प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।

आरोपी पक्ष का दावा: “लाखों की हुई चोरी”

​दूसरी ओर, आरोपी पक्ष के राज कुमार ठाकुर ने भी काउंटर केस दर्ज कराया है। उनका दावा है कि जितेंद्र और उसके दो साथी खिड़की तोड़कर घर में घुसे थे और गोदरेज से 4.63 लाख रुपये नकद और लाखों के जेवर चोरी कर लिए। भागने के दौरान जितेंद्र पकड़ा गया जबकि उसके साथी फरार हो गए।

कानून हाथ में लेने पर कार्रवाई

​थानाध्यक्ष अवधेश कुमार ने स्पष्ट किया है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। पुलिस ने मुख्य आरोपी राज कुमार ठाकुर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी है।

पुलिस जांच के मुख्य बिंदु:

  • मेडिकल रिपोर्ट: युवक के शरीर पर चोटों के निशान और प्राइवेट पार्ट पर हमले की जांच।
  • चोरी का दावा: क्या वास्तव में 4.63 लाख रुपये की चोरी हुई या यह रंजिश का हिस्सा है?
  • भीड़ की हिंसा: पुलिस के काम में बाधा डालने और युवक को बंधक बनाने वालों की पहचान।

निष्कर्ष: पूर्णिया की यह घटना दिखाती है कि कैसे ‘मॉब जस्टिस’ यानी भीड़ द्वारा न्याय करने की प्रवृत्ति समाज के लिए घातक साबित हो रही है। पुलिस अब दोनों पक्षों के दावों की गहनता से जांच कर रही है, लेकिन युवक की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।

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