Bihar Crime: मुजफ्फरपुर में खौफ! पेटी कॉन्ट्रैक्टर ने मुख्य ठेकेदार से मांगी 50 लाख की रंगदारी, बोला- ‘पैसे दो या काम छोड़ो’
मुजफ्फरपुर। बिहार में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब साथ काम करने वाले लोग ही जान के दुश्मन बनने लगे हैं। ताजा मामला मुजफ्फरपुर जिले के अहियापुर थाना क्षेत्र का है, जहाँ एक मुख्य ठेकेदार को उसके ही पेटी कॉन्ट्रैक्टर (Sub-contractor) ने ₹50 लाख की रंगदारी के लिए धमकाया है। इस धमकी के बाद से ठेकेदार और उनका परिवार गहरे दहशत में है।
भीम बराज कार्य से शुरू हुआ विवाद
पीड़ित ठेकेदार राम सिंह बादल ने पुलिस को बताया कि वह लंबे समय से निर्माण कार्यों से जुड़े हैं। वर्तमान में सुपौल जिले के वीरपुर स्थित भीम बराज (कोशी कनाल) पर उनका बड़ा प्रोजेक्ट चल रहा है। इसी प्रोजेक्ट के दौरान रौशन कुमार, राजीव कुमार और गोपाल कुमार नाम के व्यक्तियों ने उनसे संपर्क किया और पेटी कॉन्ट्रैक्ट (पेटी पर काम) लिया। शुरुआत में सब कुछ ठीक रहा और कंपनी के नियमों के अनुसार उन्हें भुगतान और डीजल का खर्च भी दिया गया।
मैनेजर से मारपीट और कार्यालय में गुंडागर्दी
विवाद तब शुरू हुआ जब पेटी कॉन्ट्रैक्टरों ने और अधिक काम की मांग शुरू कर दी। आरोप है कि जब उनकी मांग पूरी नहीं हुई, तो आरोपियों ने ठेकेदार के कार्यालय पर धावा बोल दिया। वहाँ मौजूद मैनेजर के साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि उसे धमकी दी गई कि “अपने मालिक से कहो कि हमें और काम दे, नहीं तो यहाँ काम करना छोड़ दे।”
फोन पर 50 लाख की रंगदारी की मांग
मैनेजर से बदसलूकी के बाद मामला और गंभीर हो गया। ठेकेदार राम सिंह बादल का आरोप है कि आरोपियों ने उन्हें फोन कर सीधे तौर पर धमकी दी। उन्होंने कहा कि यदि उन्हें मनमुताबिक काम नहीं मिला, तो वे प्रोजेक्ट चलने नहीं देंगे। इसके बदले में उन्होंने ₹50 लाख की भारी-भरकम राशि की मांग की।
पुलिस की कार्रवाई और सुरक्षा का सवाल
घटना की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित ठेकेदार ने अहियापुर थाना में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई है। इस मामले पर अहियापुर थाना प्रभारी रोहन कुमार ने बताया, “प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। बराज कैनाल कार्य से जुड़े पेटी कॉन्ट्रैक्टरों द्वारा रंगदारी मांगने और धमकी देने का मामला है। पुलिस आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटा रही है और जल्द ही उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जाएगी।”
बिहार में बढ़ता ‘रंगदारी’ कल्चर?
मुजफ्फरपुर में हुई यह घटना बिहार में ठेकेदारी और निर्माण कार्यों में बढ़ते अपराध की ओर इशारा करती है। विकास कार्यों में इस तरह की बाधा न केवल प्रोजेक्ट में देरी करती है, बल्कि निवेशकों और व्यवसायियों के मन में असुरक्षा की भावना भी पैदा करती है।
निष्कर्ष
पुलिस अब फोन कॉल रिकॉर्ड्स और कार्यालय में हुई मारपीट के आधार पर जांच को आगे बढ़ा रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन कितनी जल्दी इन आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजता है ताकि निर्माण कार्य सुचारू रूप से जारी रह सके।



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