बिहार: जहानाबाद में फर्जी डिग्री पर ‘मास्टरनी’ बनने का खेल खत्म, निगरानी की जांच में खुली पोल; शिक्षिका संगीता कुमारी पर FIR दर्ज
जहानाबाद: बिहार में फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षक की नौकरी पाने वालों के खिलाफ सरकार और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। ताजा मामला जहानाबाद जिले से सामने आया है, जहाँ एक शिक्षिका ने फर्जी बीएड (B.Ed.) अंकपत्र के सहारे न केवल बहाली पाई, बल्कि सालों तक सरकारी खजाने से वेतन भी उठाती रहीं। अब निगरानी विभाग की गहन जांच के बाद इस ‘बड़े खेल’ का पर्दाफाश हुआ है और आरोपी शिक्षिका के खिलाफ नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।
2015 में हुई थी बहाली, अब जाकर खुली पोल
मामला जिला परिषद नियोजन इकाई के माध्यम से हुई नियुक्तियों से जुड़ा है। आरोपी शिक्षिका संगीता कुमारी की नियुक्ति वर्ष 2015 में उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, केसर बाग (खैरा) में की गई थी। संगीता कुमारी मूल रूप से नवादा जिले के न्यू एरिया पातालपुरी मोहल्ले की रहने वाली हैं, हालांकि वर्तमान में वे पटना के अनीसाबाद क्षेत्र में रह रही थीं।
नियोजन के समय उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने गौहाटी विश्वविद्यालय (Guwahati University) से बीएड का प्रशिक्षण प्राप्त किया है और उसी का अंक पत्र (Marksheet) उन्होंने दस्तावेजों के साथ संलग्न किया था।
निगरानी विभाग की जांच में दो बार ‘फेल’ हुआ सर्टिफिकेट
शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए राज्य व्यापी अभियान के दौरान संगीता कुमारी का मामला निगरानी विभाग के रडार पर आया। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के पुलिस उपाधीक्षक विंध्याचल प्रसाद ने इस मामले की जांच शुरू की।
- प्रथम सत्यापन (2023): जब गौहाटी विश्वविद्यालय से शिक्षिका के बीएड अंकपत्र का मिलान कराया गया, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे अपने रिकॉर्ड से मेल न खाने वाला बताते हुए ‘फर्जी’ करार दिया।
- द्वितीय सत्यापन (जनवरी 2026): किसी भी तरह के संदेह को दूर करने के लिए निगरानी विभाग ने इसी साल जनवरी में दोबारा दस्तावेजों का सत्यापन कराया। दूसरी बार की जांच में भी यह पूरी तरह प्रमाणित हो गया कि शिक्षिका द्वारा प्रस्तुत बीएड की डिग्री पूरी तरह जाली है।
सत्यापन की इस रिपोर्ट के आधार पर निगरानी विभाग ने जहानाबाद नगर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद अब कानूनी कार्रवाई का दौर शुरू हो गया है।
फर्जीवाड़ा करने वाले शिक्षकों में हड़कंप
जहानाबाद नगर थाना अध्यक्ष ने पुष्टि की है कि निगरानी विभाग की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने कहा, “कानून के दायरे में रहकर विधि-सम्मत कार्रवाई की जाएगी और जल्द ही आगे की कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।”
इस कार्रवाई के बाद जिले में उन शिक्षकों के बीच हड़कंप मच गया है जिन्होंने नियोजन के समय बाहरी राज्यों के विश्वविद्यालयों या फर्जी संस्थानों की डिग्रियां लगाई थीं। गौरतलब है कि बिहार सरकार के निर्देश पर निगरानी विभाग उन सभी शिक्षकों के फोल्डर की जांच कर रहा है जिनकी नियुक्तियां पिछले कुछ वर्षों में नियोजित इकाइयों के माध्यम से हुई थीं।
वेतन वसूली और जेल की तैयारी
नियमानुसार, यदि कोई शिक्षक फर्जी प्रमाण पत्र पर कार्यरत पाया जाता है, तो न केवल उसकी सेवा समाप्त की जाती है, बल्कि अब तक उसके द्वारा उठाए गए कुल वेतन की राशि की वसूली (Recovery) भी ब्याज सहित की जाती है। संगीता कुमारी के मामले में भी अब वेतन वसूली और गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।
निष्कर्ष
यह मामला बिहार की शिक्षा व्यवस्था में व्याप्त भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को दर्शाता है। हालांकि, निगरानी विभाग की सक्रियता से यह साफ है कि अब फर्जीवाड़ा करने वालों के लिए बचने का कोई रास्ता नहीं बचा है। जहानाबाद की इस कार्रवाई से अन्य नियोजन इकाइयों को भी यह कड़ा संदेश गया है कि भविष्य में नियुक्तियों के समय दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच कितनी अनिवार्य है



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