Headline: बिहार में बड़ी लापरवाही: इंजेक्शन लगाते समय नवजात की जांघ में टूटी सुई, इलाज के लिए दर-दर भटके परिजन
प्रस्तावना: लापरवाही की पराकाष्ठा
बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वैशाली जिले से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने मानवता और चिकित्सा पेशे, दोनों को शर्मसार कर दिया है। यहाँ एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में तैनात एएनएम (ANM) की गंभीर लापरवाही के कारण एक नवजात शिशु की जान जोखिम में पड़ गई। बच्चे को जन्म के तुरंत बाद दिए जाने वाले इंजेक्शन के दौरान सुई का एक हिस्सा टूटकर उसकी जांघ में ही रह गया, जिससे मासूम को असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ा।
क्या है पूरा मामला?
यह घटना वैशाली जिले के राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की है। जानकारी के अनुसार, बैकुंठपुर पंचायत के रहने वाले कृष्णा कुमार की पत्नी निशु कुमारी को प्रसव पीड़ा होने के बाद इस केंद्र में भर्ती कराया गया था। निशु ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया, जिससे परिवार में खुशी का माहौल था। प्रसव की पूरी प्रक्रिया एएनएम प्रमिला और उषा की देखरेख में संपन्न हुई।
असली त्रासदी तब शुरू हुई जब एएनएम उषा ने नवजात को टीका (इंजेक्शन) लगाना शुरू किया। इंजेक्शन देने के दौरान सुई अचानक टूट गई और उसका एक बड़ा हिस्सा बच्चे की जांघ की मांसपेशियों के अंदर ही फंस गया।
परिजनों का आरोप: छिपाई गई सच्चाई
पीड़ित परिवार का आरोप है कि घटना के तुरंत बाद एएनएम ने उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी। जब बच्चा लगातार रोने लगा और उसकी जांघ में सूजन व दर्द बढ़ने लगा, तब जाकर मामले का खुलासा हुआ। परिजनों ने जब विरोध जताया, तो अस्पताल प्रशासन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए बच्चे को आनन-फानन में सदर अस्पताल हाजीपुर रेफर कर दिया।
रेफरल का चक्रव्यूह: हाजीपुर से पटना तक का सफर
हाजीपुर सदर अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने बच्चे का एक्स-रे कराया, जिसमें जांघ के अंदर फंसी सुई की पुष्टि हुई। हालांकि, अस्पताल में सर्जन की अनुपलब्धता का हवाला देते हुए नवजात को पीएमसीएच (PMCH) पटना रेफर कर दिया गया।
परिजनों की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुईं। पीएमसीएच पहुँचने पर भी उन्हें उचित सहयोग नहीं मिला और वहां से बच्चे को एम्स (AIIMS) रेफर कर दिया गया। एक सरकारी अस्पताल से दूसरे सरकारी अस्पताल के चक्कर काटते हुए मासूम की हालत बिगड़ती जा रही थी। सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की इस विफलता ने परिजनों को निजी अस्पतालों की शरण लेने पर मजबूर कर दिया।
निजी अस्पताल में हुआ सफल ऑपरेशन
सरकारी तंत्र से निराश होकर परिजन पटना के राजा बाजार स्थित एक निजी अस्पताल पहुँचे। वहां के डॉक्टरों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल ऑपरेशन का निर्णय लिया। घंटों चले सूक्ष्म ऑपरेशन के बाद आखिरकार बच्चे की जांघ से सुई का टुकड़ा निकाल लिया गया। वर्तमान में नवजात को आईसीयू (ICU) में रखा गया है, जहाँ डॉक्टर उसकी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
प्रशासनिक कार्रवाई और स्पष्टीकरण
इस पूरे मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। राजापाकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. एस.पी. उपाध्याय ने स्वीकार किया है कि यह एक गंभीर लापरवाही है। उन्होंने बताया कि इंजेक्शन देने वाली एएनएम उषा से स्पष्टीकरण (Show-cause notice) मांगा गया है। रिपोर्ट आने के बाद दोषी स्वास्थ्य कर्मी के विरुद्ध कड़ी विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जाएगी।
निष्कर्ष: कब सुधरेगी बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था?
वैशाली की यह घटना कोई पहली बार नहीं है जब बिहार के सरकारी अस्पतालों से ऐसी लापरवाही की खबर आई हो। यह घटना कई गंभीर सवाल खड़े करती है:
- क्या अस्पतालों में तैनात पैरामेडिकल स्टाफ को उचित प्रशिक्षण नहीं दिया जाता?
- जिला अस्पतालों में सर्जनों की कमी के कारण मरीजों को क्यों भटकना पड़ता है?
- क्या केवल ‘स्पष्टीकरण’ मांगना ऐसे गंभीर मामलों का समाधान है?
एक नवजात, जिसने अभी दुनिया में कदम ही रखा था, उसे सिस्टम की इस लापरवाही के कारण मौत से लड़ना पड़ा। जरूरत है कि स्वास्थ्य विभाग ऐसे मामलों में ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाए ताकि भविष्य में किसी और मासूम की जान इस तरह जोखिम में न पड़े।



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