Loading Now

शिक्षा के नाम पर बड़ा खेल: वैशाली के दो कॉलेजों में न छात्र मिले न शिक्षक, लैब से कंप्यूटर भी गायब; DM की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे

हाजीपुर (वैशाली): बिहार की शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और गुणवत्ता लाने के दावों के बीच वैशाली जिले से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। हाजीपुर स्थित दो प्रतिष्ठित कॉलेजों के औचक निरीक्षण में ऐसी अनियमितताएं मिली हैं, जिन्होंने न केवल प्रशासन बल्कि राज्य के शिक्षा विभाग को भी हिलाकर रख दिया है। जिला पदाधिकारी (DM) वर्षा सिंह के निर्देश पर गठित जांच समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि इन संस्थानों में पढ़ाई के नाम पर सिर्फ ‘कागजी खानापूर्ति’ हो रही है।

जांच के घेरे में हाजीपुर के दो कॉलेज

​जिलाधिकारी के आदेश पर गठित विशेष जांच समिति ने 23 मार्च 2026 को हाजीपुर स्थित ‘इंदू देवी रंजीत कुमार प्रकाश प्रोफेशनल कॉलेज’ और ‘डॉ. रंजीत कुमार प्रकाश कॉलेज’ का स्थलीय निरीक्षण किया। जांच टीम जब मौके पर पहुंची, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गई। करोड़ों की लागत से बने भवनों के भीतर न तो कोई छात्र मौजूद था, न कोई शिक्षक और न ही कोई गैर-शैक्षणिक कर्मचारी। ऐसा लग रहा था मानो संस्थान केवल फाइलों में चल रहे हों।

लैब में उपकरण नहीं, कंप्यूटर गायब

​जांच रिपोर्ट में सबसे गंभीर आरोप संसाधनों की कमी को लेकर लगाए गए हैं। नियमानुसार, प्रोफेशनल कॉलेजों में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं और कंप्यूटर लैब अनिवार्य हैं। लेकिन निरीक्षण के दौरान पाया गया कि:

  • ​प्रायोगिक परीक्षाओं के लिए आवश्यक उपकरणों का लैब में पूरी तरह अभाव था।
  • ​सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कंप्यूटर लैब में एक भी कंप्यूटर मौजूद नहीं था। * पुस्तकालय की स्थिति बदहाल थी और वहां शैक्षणिक गतिविधियों का कोई नामोनिशान नहीं मिला।

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना का ‘दुरुपयोग’?

​जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में बिहार सरकार की महत्वाकांक्षी ‘स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना’ (BSCC) को लेकर भी गंभीर चिंता जताई है। संस्थानों पर आरोप था कि वे छात्रों के नाम पर ऋण स्वीकृत कराकर मोटी रकम वसूलते हैं और बाद में कुछ हिस्सा वापस कर देते हैं। हालांकि, तकनीकी रूप से ऋण राशि सीधे खातों में जाती है, इसलिए इस वित्तीय हेराफेरी की पुष्टि के लिए गहन जांच की आवश्यकता बताई गई है। समिति ने माना कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली सरकार की योजनाओं की छवि को धूमिल कर रही है।

डिग्री की गुणवत्ता पर उठे सवाल

​जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में एक कड़ा नोट लिखा है। रिपोर्ट के अनुसार, “यदि इन संस्थानों से छात्र डिग्री प्राप्त कर रहे हैं, तो उनकी शैक्षणिक योग्यता उस डिग्री के मानकों के अनुरूप है या नहीं, यह एक बड़ा प्रश्नचिह्न है।” बिना क्लास, बिना लैब और बिना शिक्षक के डिग्री बांटना सीधे तौर पर छात्रों के भविष्य और देश की मेधा के साथ खिलवाड़ है।

सहयोग करने से कतरा रहे संस्थान

​जांच समिति ने जब इन कॉलेजों से पिछले पांच वर्षों के नामांकन, उत्तीर्ण छात्रों और ड्रॉप-आउट का डेटा मांगा, तो संस्थानों ने जानकारी उपलब्ध कराने में असमर्थता जताई। जानकारी छिपाना और जांच में सहयोग न करना संस्थानों की संदिग्ध मंशा को और अधिक पुख्ता करता है। इससे यह भी स्पष्ट नहीं हो पा रहा है कि कितने फर्जी दाखिले किए गए हैं।

संबद्धता रद्द करने की अनुशंसा

​पूरी जांच के बाद समिति ने वैशाली जिलाधिकारी को सौंपी गई रिपोर्ट में कड़े कदम उठाने की सिफारिश की है। जांच दल ने संबंधित विश्वविद्यालयों को पत्र लिखकर इन दोनों कॉलेजों की संबद्धता (Affiliation) पर पुनर्विचार करने और नियमों के उल्लंघन के आधार पर इसे रद्द करने की अनुशंसा की है।

निष्कर्ष: सिस्टम की विफलता?

​वैशाली की यह घटना बिहार के उन कई निजी और प्रोफेशनल कॉलेजों की बानगी है, जो केवल सरकारी अनुदान और छात्रवृत्ति के भरोसे चल रहे हैं। जिलाधिकारी वर्षा सिंह की इस सक्रियता ने जिले के अन्य शिक्षण संस्थानों में भी हड़कंप मचा दिया है। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इन ‘भूतिया’ कॉलेजों पर क्या अंतिम कार्रवाई करता है।

Previous post

वैशाली में बोलेरो चोरी की बड़ी साजिश नाकाम: ग्रामीणों ने दो शातिर चोरों को रंगे हाथ दबोचा, जमकर हुआ हंगामा

Next post

Headline: बिहार में बड़ी लापरवाही: इंजेक्शन लगाते समय नवजात की जांघ में टूटी सुई, इलाज के लिए दर-दर भटके परिजन

Post Comment

You May Have Missed