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Bihar: मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नीतीश कुमार का ‘एक्शन प्लान’, स्वास्थ्य विभाग और संगठन को लेकर हुई महाबैठक

पटना। बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। रविवार को मुख्यमंत्री आवास पर जदयू कोटे के नवनियुक्त मंत्रियों और पार्टी के वरिष्ठ रणनीतिकारों के साथ एक हाई-लेवल बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य केंद्र सरकार की छवि को सुधारना, स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना और संगठन को नई धार देना रहा।
​नए मंत्रियों को ‘परफॉरमेंस’ का मंत्र
​बैठक के दौरान नीतीश कुमार ने साफ कर दिया कि केवल मंत्री पद पा लेना काफी नहीं है, बल्कि जनता के बीच काम दिखना चाहिए। उन्होंने नवनियुक्त मंत्रियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने विभागों की फाइलों का त्वरित निस्तारण करें और जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारें।
​शिष्टाचार मुलाकात: मंत्री अशोक चौधरी और लेशी सिंह ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी प्राथमिकताओं पर चर्चा की।
​लक्ष्य: मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और संगठन के बीच तालमेल ऐसा हो कि जनता तक शासन का लाभ बिना किसी बाधा के पहुंचे।
​स्वास्थ्य विभाग पर विशेष फोकस: मंत्री निशांत कुमार के साथ मंथन
​बैठक में सबसे अधिक समय स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा को दिया गया। स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के विभागीय कामकाज और भविष्य की योजनाओं को लेकर नीतीश कुमार ने वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लिया। बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने, अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपस्थिति सुनिश्चित करने पर कड़ा रुख अपनाया गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया कि स्वास्थ्य क्षेत्र में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
​कोलकाता से लौटते ही दिग्गजों की मंत्रणा
​इस बैठक में जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की मौजूदगी काफी अहम रही। ये दोनों नेता एक दिन पहले ही कोलकाता में पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह से लौटे थे।
​कोलकाता का राजनीतिक फीडबैक: ललन सिंह और संजय झा ने कोलकाता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ हुई मुलाकातों और वहां की राजनीतिक गतिविधियों की जानकारी नीतीश कुमार के साथ साझा की।
​आगामी रणनीति: माना जा रहा है कि इस चर्चा में राष्ट्रीय राजनीति में जदयू की भूमिका और बिहार में विपक्ष के घेराव को लेकर नई बिसात बिछाई गई है।
​संगठन और सरकार के बीच सेतु
​नीतीश कुमार ने नेताओं को संगठन और सरकार के बीच एक मजबूत सेतु बनाने का टास्क दिया है। उनका मानना है कि अगर पार्टी के कार्यकर्ता सरकार की उपलब्धियों को सही ढंग से जनता तक पहुंचाएंगे, तो इससे सरकार की छवि और बेहतर होगी। उन्होंने नेताओं से कहा, “काम ऐसा कीजिए जिससे जनता के बीच सरकार का इकबाल और भरोसा दोनों बढ़े।”
​निष्कर्ष: 2025 की तैयारी?
​राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार के तुरंत बाद इस तरह की सघन बैठकें संकेत देती हैं कि नीतीश कुमार आगामी चुनौतियों और चुनाव की तैयारियों को लेकर गंभीर हैं। स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग पर उनका सीधा हस्तक्षेप बताता है कि वे बुनियादी सुविधाओं के जरिए अपनी पैठ और मजबूत करना चाहते हैं।

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