बिहार: जहानाबाद में प्रशासनिक मनमानी के खिलाफ फूटा जनप्रतिनिधियों का गुस्सा, 11 पंचायत समिति सदस्यों ने दी सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी
जहानाबाद। बिहार के जहानाबाद जिले से पंचायत राजनीति की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जिले के रतनी फरीदपुर प्रखंड में पंचायत समिति सदस्यों और प्रखंड प्रशासन के बीच ठन गई है। प्रशासन पर मनमानी और जनप्रतिनिधियों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए 11 पंचायत समिति सदस्यों ने एक साथ सामूहिक इस्तीफे की चेतावनी दी है। इस घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया है।
नाराज सदस्यों ने अपनी शिकायतों के साथ जिला पदाधिकारी (DM) कार्यालय का रुख किया और स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे अपने पद से त्यागपत्र दे देंगे।
क्या है विवाद की मुख्य वजह?
पंचायत समिति सदस्यों का मुख्य आरोप प्रखंड प्रशासन की कार्यशैली को लेकर है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि:
- विकास कार्यों में अपारदर्शिता: प्रखंड में चल रही विभिन्न विकास योजनाओं में पारदर्शिता का पूरी तरह अभाव है।
- जनप्रतिनिधियों की अनदेखी: महत्वपूर्ण निर्णय लेने की प्रक्रिया में समिति सदस्यों को शामिल नहीं किया जाता। कई योजनाएं उनकी जानकारी के बिना ही शुरू और संचालित की जा रही हैं।
- पदाधिकारियों की मनमानी: सदस्यों का कहना है कि पिछले कई महीनों से अधिकारी अपनी मर्जी से कार्य कर रहे हैं और जनप्रतिनिधियों की बातों को अनसुना किया जा रहा है।
सदस्यों ने दो टूक शब्दों में कहा, “जब जनता द्वारा चुने जाने के बावजूद हम क्षेत्र के विकास में अपनी भूमिका नहीं निभा पा रहे और हमारी बात नहीं सुनी जा रही, तो ऐसे में जनप्रतिनिधि बने रहने का कोई औचित्य नहीं है।”
बैठक स्थगित होने से बढ़ा आक्रोश
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब पंचायत समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक को स्थगित करना पड़ा। इस संबंध में प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) आकांक्षा सिन्हा ने अपना पक्ष रखते हुए बताया कि नियमानुसार पंचायत समिति की बैठक संपन्न कराने के लिए कम से कम 13 सदस्यों की उपस्थिति (कोरम) अनिवार्य होती है।
संबंधित बैठक में कोरम पूरा करने के लिए पर्याप्त सदस्य मौजूद नहीं थे, जिस कारण तकनीकी रूप से बैठक को स्थगित करना पड़ा। हालांकि, सदस्यों का आरोप है कि प्रशासन जानबूझकर ऐसी स्थितियां पैदा कर रहा है जिससे जनप्रतिनिधियों की शक्ति कम हो।
प्रशासन का आश्वासन और भविष्य की रणनीति
विवाद बढ़ने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। वरीय अधिकारियों ने नाराज सदस्यों को भरोसा दिलाया है कि उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि सभी पक्षों को सुनने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा और यदि किसी स्तर पर अनियमितता पाई जाती है, तो आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
क्षेत्रीय विकास पर पड़ रहा है असर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच इस तरह का टकराव विकास कार्यों के लिए घातक है। रतनी फरीदपुर प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में नाली-गली, शिक्षा और स्वास्थ्य से जुड़ी कई योजनाएं पाइपलाइन में हैं, जो इस राजनीतिक अस्थिरता के कारण प्रभावित हो सकती हैं।
निष्कर्ष
जहानाबाद के रतनी फरीदपुर प्रखंड का यह मामला बिहार की पंचायत राज व्यवस्था में अधिकारियों और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच के समन्वय की कमी को उजागर करता है। अब सबकी निगाहें जिला प्रशासन की जांच और अगली बैठक पर टिकी हैं। यदि प्रशासन सदस्यों को संतुष्ट करने में विफल रहता है, तो सामूहिक इस्तीफा जहानाबाद की राजनीति में एक बड़ा संकट पैदा कर सकता है।



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