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छपरा में आईसीडीएस की डीपीओ कार्यालय का वीडियो वायरल, पैसों के लेन-देन को लेकर हुई तीखी बहस

छपरा में आईसीडीएस डीपीओ कार्यालय का एक कथित वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें पैसों के लेन-देन को लेकर बहस सुनाई दे रही है। युवक ने 2.40 लाख रुपये को लेकर दबाव का आरोप लगाया है। मामले की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। पढ़ें पूरी खबर…

Video from ICDS DPO Office in Chhapra Goes Viral Sparks Heated Argument Over Financial Dealings

डीपीओ कार्यालय का वीडियो वायरल – फोटो : Amar Ujalaविज्ञापन

विस्तार

बिहार के छपरा से एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने प्रशासनिक महकमे में हलचल पैदा कर दी है। बताया जा रहा है कि यह वीडियो सारण समाहरणालय परिसर स्थित आईसीडीएस के जिला परियोजना पदाधिकारी (डीपीओ) कार्यालय का है।

पैसों के लेन-देन को लेकर हुई थी बहस
वायरल वीडियो में एक युवक और डीपीओ के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर तीखी बातचीत सुनाई दे रही है। वीडियो में युवक “मैडम पहुंचा देंगे” कहते हुए सुनाई देता है, जिस पर डीपीओ सवाल करती हैं कि पैसा कब मिला और अगले दिन क्यों नहीं लौटाया गया। युवक जवाब में बताता है कि वह डिलीवरी के काम में चला गया था।
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आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल की बात सामने आई
इस पर डीपीओ सख्त लहजे में प्रतिक्रिया देते हुए कहती हैं कि वह कोई कहानी नहीं सुनेंगी और अगले दिन सुबह तक पैसे लौटाने का समय तय करने को कहती हैं। बातचीत के दौरान डीपीओ की ओर से कुछ आपत्तिजनक शब्दों के इस्तेमाल की भी बात सामने आ रही है।
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इधर, वीडियो में आगे डीपीओ यह भी कहती सुनाई देती हैं कि जितनी राशि युवक को मिली है, उसका पूरा हिसाब लेकर आए, तभी आगे की प्रक्रिया होगी। इस दौरान सोनू नाम के एक व्यक्ति का भी जिक्र किया गया है, जिसके बारे में डीपीओ का कहना है कि उन्हें पहले ही पूरी जानकारी दे दी गई है।

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राशि वापस करने का दबाव बनाया जा रहा है
युवक बार-बार समय की मांग करता है और सोमवार तक मोहलत देने की बात कहता है। इस पर डीपीओ उससे समय स्पष्ट करने को कहती हैं, जिसके बाद वीडियो समाप्त हो जाता है। युवक का आरोप है कि उसे वाहन किराये के नाम पर करीब 2 लाख 40 हजार रुपये दिए गए थे, लेकिन अब उससे पूरी राशि वापस करने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि इस मामले में जब डीपीओ किरण शर्मा से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उनसे बात नहीं हो सकी।

फिलहाल, वीडियो की सत्यता की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है।

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