बिहार भाजपा में ‘सब ठीक’ है? महात्मा ज्योतिबा फुले जयंती कार्यक्रम से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी नदारद; सियासी हलकों में अटकलें तेज
पटना। बिहार की राजधानी पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में शनिवार को महात्मा ज्योतिबा फुले की 199वीं जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर पार्टी के कई दिग्गज नेता अटल सभागार में जुटे, लेकिन सबकी निगाहें उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को ढूंढती रहीं। कार्यक्रम में उनकी गैरमौजूदगी ने बिहार के सियासी गलियारों में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
मुख्य अतिथि थे सम्राट चौधरी, पर खाली रही कुर्सी
कार्यक्रम की रूपरेखा के अनुसार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना था। उनके नाम की चर्चा हर तरफ थी, लेकिन जब कार्यक्रम शुरू हुआ तो वे मंच पर नजर नहीं आए। उनके न आने के बाद यह चर्चा तेजी से फैल गई कि क्या सम्राट चौधरी किसी बात को लेकर पार्टी नेतृत्व से नाराज हैं? राजनीतिक गलियारों में इस बात की भी चर्चा रही कि हाल के दिनों में मुख्यमंत्री की ‘रेस’ से जुड़े बयानों के चलते वे दूरी बना रहे हैं।
विजय सिन्हा ने दी सफाई: “एक डिप्टी सीएम का होना ही काफी”
जब इस गैरमौजूदगी पर सवाल उठे, तो दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा बचाव में आए। उन्होंने नाराजगी की खबरों को पूरी तरह से निराधार बताते हुए कहा:
”पार्टी में कोई नाराजगी नहीं है। सरकार और संगठन के काम चलते रहते हैं। दो उपमुख्यमंत्रियों में से एक की मौजूदगी भी कार्यक्रम की गरिमा के लिए पर्याप्त है।”
भाजपा संगठन का पक्ष: “इसे विवाद न बनाएं”
पार्टी के मीडिया प्रभारी दानिश इकबाल ने भी स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि सम्राट चौधरी किसी अपरिहार्य कारणवश नहीं आ सके। उन्होंने तर्क दिया कि प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी भी कार्यक्रम में मौजूद नहीं थे, तो क्या उन्हें भी नाराज माना जाए? उन्होंने अपील की कि इसे केवल एक सामान्य अनुपस्थिति के रूप में देखा जाना चाहिए।
कार्यक्रम में ये दिग्गज रहे मौजूद
सम्राट चौधरी की अनुपस्थिति के बावजूद कार्यक्रम में भाजपा के कई बड़े चेहरे शामिल हुए:
- उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा
- मंत्री दिलीप जायसवाल
- वरिष्ठ नेता रामकृपाल यादव
- विधायक संजीव चौरसिया और अन्य पदाधिकारी।
निष्कर्ष: क्या यह केवल सामान्य अनुपस्थिति है?
भले ही भाजपा नेता और संगठन इसे सामान्य बता रहे हों, लेकिन बिहार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति में सम्राट चौधरी जैसे कद्दावर नेता का अपनी ही पार्टी के बड़े कार्यक्रम से गायब रहना कई सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में उनकी सक्रियता ही इन अटकलों पर विराम लगाएगी।



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