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इंसानियत अभी जिंदा है: पूर्णिया में तमाशबीन बने रहे लोग, वीडियो बनाते रहे मोबाइल; टोटो चालक ने जान पर खेल बचाई नदी में कूदी युवती की जान

पूर्णिया। बिहार के पूर्णिया जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली और साथ ही एक जांबाज टोटो चालक की बहादुरी की मिसाल पेश करने वाली खबर सामने आई है। शुक्रवार की शाम कप्तान पुल के समीप एक युवती ने अचानक सौरा नदी में छलांग लगा दी। इस संकट की घड़ी में जहाँ पुल पर मौजूद दर्जनों लोग मदद करने के बजाय अपने मोबाइल से वीडियो बनाने में मशगूल थे, वहीं एक टोटो चालक ने ‘देवदूत’ बनकर युवती को नई जिंदगी दी।

किराया दिया और लगा दी छलांग

​घटना की जानकारी देते हुए लाइन बाजार छोटी मस्जिद निवासी टोटो चालक पिंटू आलम ने बताया कि युवती कला भवन रोड से उसके टोटो पर सवार हुई थी। कप्तान पुल के पास पहुँचने पर उसने टोटो रुकवाया, चालक को किराया दिया और नीचे उतर गई। पिंटू अभी कुछ समझ ही पाता कि युवती तेजी से पुल की रेलिंग पर चढ़ी और सीधे सौरा नदी की उफनती लहरों में कूद गई।

समाज की संवेदनहीनता: मदद नहीं, वीडियो बनाया

​युवती के पानी में कूदते ही पुल पर लोगों का जमावड़ा लग गया। दुखद पहलू यह रहा कि लोग डूबती युवती को बचाने के लिए आगे आने के बजाय इस पूरी घटना को अपने मोबाइल कैमरों में कैद करने लगे। करीब आधे घंटे तक पुल पर अफरा-तफरी और जाम की स्थिति बनी रही, लेकिन कोई भी पानी में उतरने को तैयार नहीं हुआ।

पिंटू आलम की जांबाजी: खुद नदी में कूदे और बचाई जान

​भीड़ की संवेदनहीनता देख टोटो चालक पिंटू आलम ने अपनी जान की परवाह नहीं की। उसने बिना देरी किए पुल से नदी में छलांग लगा दी। पिंटू ने कड़ी मशक्कत के बाद युवती को डूबने से बचाया और उसे सुरक्षित किनारे पर लेकर आया। पिंटू की इस जांबाजी को देख वहां मौजूद लोग दंग रह गए। अब पूरे पूर्णिया शहर में पिंटू की इस बहादुरी की सराहना हो रही है।

आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव की आशंका

​युवती को बचाने के बाद उसे स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया। पुलिस पूछताछ में युवती ने आत्मघाती कदम उठाने के कारणों पर चुप्पी साध ली। हालांकि, सूत्रों के अनुसार युवती रामबाग इलाके की रहने वाली है और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब है। उसकी माँ दूसरों के घरों में काम करके गुजारा करती है। आशंका जताई जा रही है कि गंभीर मानसिक तनाव या पारिवारिक कलह के चलते उसने यह कदम उठाया होगा।

संपादकीय टिप्पणी: संवेदनहीन होता समाज

​यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी तकनीक और मोबाइल ने हमसे हमारी संवेदनाएं छीन ली हैं? पिंटू आलम जैसे लोग ही हमें याद दिलाते हैं कि आज भी समाज में निस्वार्थ सेवा और साहस जिंदा है।

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