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बिहार में सियासी हलचल: ‘नया CM आते ही खत्म होगी शराबबंदी’, सहरसा में प्रशांत किशोर का बड़ा दावा; आर्थिक संकट पर सरकार को घेरा

सहरसा। जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने शनिवार को सहरसा में एक बार फिर बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। कार्यकर्ताओं के साथ बैठक के दौरान पीके ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि बिहार वर्तमान में एक गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है और इस स्थिति से निपटने के लिए आने वाली नई सरकार शराबबंदी को खत्म करने जैसा बड़ा कदम उठा सकती है।

‘खजाने की स्थिति खराब, शराबबंदी पर टिकेगी उम्मीद’

​प्रशांत किशोर ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि वोट हासिल करने के लिए जनता के ही करीब 30,000 करोड़ रुपये खर्च कर दिए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदारों और आम लोगों का भुगतान अटका हुआ है। पीके ने दावा किया कि:

​”बिहार इस समय भयंकर आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहा है। इस संकट से उबरने और राजस्व जुटाने के लिए जो भी नया मुख्यमंत्री कुर्सी पर बैठेगा, वह शराबबंदी खत्म कर शराब की दुकानें फिर से खुलवा सकता है।”

नीतीश कुमार की नेतृत्व क्षमता पर सवाल

​नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच पीके ने कहा कि उन्होंने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि नीतीश कुमार लंबे समय तक मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। उन्होंने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भाजपा और जदयू ने केवल वोट बटोरने के लिए उनके चेहरे का इस्तेमाल किया है। पीके के अनुसार, मौजूदा सरकार का बहुमत “शुद्ध” नहीं है बल्कि इसे अन्य तरीकों से मैनेज किया गया है।

जन सुराज का भविष्य का रोडमैप: पंचायत चुनाव पर नजर

​सहरसा की बैठक में प्रशांत किशोर ने संगठन की मजबूती और आगामी चुनावों को लेकर स्पष्ट योजना साझा की:

  • अप्रैल से जून: जिले का संगठनात्मक ढांचा तैयार करना और ब्लॉक-पंचायत स्तर तक कमेटियों को मजबूत करना।
  • जुलाई से सितंबर: पूरे राज्य में सघन सदस्यता अभियान (Membership Drive) चलाना।
  • अक्टूबर से दिसंबर: आगामी पंचायत चुनावों के लिए रणनीति तैयार करना और उम्मीदवारों की भागीदारी तय करना।

​प्रशांत किशोर ने एलान किया कि बिहार के नवनिर्माण का यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक राज्य की स्थिति में सुधार नहीं हो जाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यकारिणी का गठन कागजों पर नहीं बल्कि जमीन पर होगा, जिसकी निगरानी वह स्वयं करेंगे।

निष्कर्ष: बिहार की राजनीति में ‘शराब’ एक बड़ा मुद्दा?

​प्रशांत किशोर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में शराबबंदी की सफलता और विफलता को लेकर अक्सर सवाल उठते रहते हैं। यदि पीके का यह दावा सही साबित होता है, तो आने वाले समय में बिहार की राजनीति में शराबबंदी का मुद्दा सबसे बड़ा चुनावी टर्निंग पॉइंट बन सकता है।

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