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पटना: थैलेसीमिया मुक्त बिहार की ओर बड़ा कदम, ‘100% HLA मैच कैंप’ से 44 बच्चों को जीवनदान

पटना, बिहार: थैलेसीमिया एक ऐसी गंभीर बीमारी है, जो न केवल बच्चे का बचपन छीन लेती है, बल्कि पूरे परिवार को मानसिक और आर्थिक रूप से तोड़ देती है। लेकिन, पटना में आयोजित “100% HLA मैच कैंप” ने बिहार के दर्जनों परिवारों के लिए उम्मीद की एक नई किरण जगाई है। मां वैष्णो देवी सेवा समिति द्वारा आयोजित इस कैंप में स्क्रीनिंग के बाद, 44 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट (Bone Marrow Transplant) कराने का रास्ता साफ हो गया है। बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने भी इस मानवीय पहल की भूरी-भूरी सराहना की है।

क्या है “100% HLA मैच कैंप”?

​थैलेसीमिया का एकमात्र स्थायी इलाज बोन मैरो ट्रांसप्लांट है। इसके लिए, मरीज का स्टेम सेल उसके सगे भाई-बहन के स्टेम सेल से 100% मैच होना अनिवार्य होता है। इस मेडिकल मैचिंग प्रक्रिया को ही HLA (Human Leukocyte Antigen) मैच कहा जाता है। पटना के दरियापुर स्थित मां ब्लड सेंटर में आयोजित इस कैंप का मुख्य उद्देश्य ऐसे ही बच्चों की पहचान करना था, जिनका बोन मैरो मैचिंग सफल हो सके।

44 बच्चों को मिलेगा नया जीवन

​संस्था के संस्थापक मुकेश हिसारिया और महासचिव संजय तोतला ने बताया कि 15 नवंबर 2025 को आयोजित कैंप में जिन बच्चों का HLA मैच सफल पाया गया था, उनमें से 46 बच्चों की दोबारा स्क्रीनिंग की गई। इस दोबारा स्क्रीनिंग में 44 बच्चे बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए पूरी तरह सफल पाए गए। अब नारायण हेल्थ सिटी के विशेषज्ञों की देखरेख में इन बच्चों का इलाज शुरू किया जाएगा।

राज्यपाल सैयद अता हसनैन ने की सराहना

​कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने संस्था द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों को समाज के लिए प्रेरणादायक बताया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा:

“यह संस्था मानवता की निःस्वार्थ सेवा का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। संस्था जिस तरह सभी धर्मों और समुदायों के लिए कार्य कर रही है, वह सराहनीय है। रक्तदान, थैलेसीमिया जागरूकता, चश्मा बैंक और मुक्तिरथ जैसी पहल समाज के लिए महत्वपूर्ण हैं।”

​राज्यपाल ने लोगों से इन अभियानों से जुड़ने की अपील की और सामूहिक प्रयासों से बिहार को टीबी मुक्त और नशामुक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने प्लास्टिक के बढ़ते उपयोग पर भी चिंता जताई।

सरकार देगी आर्थिक मदद

​कैंप में सफल पाए गए 44 बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। इन बच्चों के महंगे बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए भारत सरकार और प्रधानमंत्री राहत कोष (Prime Minister National Relief Fund) की ओर से आर्थिक मदद प्रदान की जाएगी। यह खबर इन परिवारों के लिए एक बड़ी राहत बनकर आई है।

थैलेसीमिया: रोकथाम और जागरूकता

​कार्यक्रम के दौरान नारायण हेल्थ सिटी के वाइस प्रेसिडेंट डॉ. सुनील भट्ट ने थैलेसीमिया के इलाज और रोकथाम पर विस्तार से जानकारी दी। विशेषज्ञों का मानना है कि थैलेसीमिया एक आनुवंशिक बीमारी है, जिसे शादी से पहले एक साधारण ब्लड टेस्ट (HB Electrophoresis) के जरिए रोका जा सकता है। समाज में इस बीमारी को लेकर जागरूकता फैलाना बेहद जरूरी है।

निष्कर्ष

​पटना में आयोजित यह “100% HLA मैच कैंप” केवल एक चिकित्सा शिविर नहीं था, बल्कि थैलेसीमिया से लड़ रहे बच्चों और उनके परिवारों के लिए जीवन की एक नई शुरुआत थी। मां वैष्णो देवी सेवा समिति और नारायण हेल्थ सिटी की यह संयुक्त पहल बिहार को थैलेसीमिया मुक्त बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

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