बिहार: आधारकार्ड में सुधार करवाने में लोगों के छूट रहे हैं पसीने, पटना जीपीओ में रोज लग रही है भारी भीड़
पटना। बिहार के दूर-दराज जिलों से राजधानी पटना पहुंच रहे हजारों लोगों को आधारकार्ड (Aadhaar Card) में छोटी-मोटी त्रुटियों को सुधारवाने में भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। पटना जीपीओ (GPO) स्थित आधार केंद्र पर हर दिन सैकड़ों की भीड़ उमड़ रही है, लेकिन लोगों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही। लंबी कतारें, बार-बार के चक्कर और निराशा हाथ लगने से लोग हताश हैं।
सेवानिवृत्त फौजी की आपबीती: तीन चक्कर के बाद भी नहीं हुआ काम
खगड़िया जिले के निवासी और एक सेवानिवृत्त फौजी कमलाकांत राय ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया, “मैं पटना जीपीओ का अब तक तीन चक्कर मार चुका हूं। आज चौथी बार यहां आया हूं, लेकिन मेरा काम होगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।” कमलाकांत को पासपोर्ट बनवाना है, लेकिन उनके नाम में वर्तनी (Spelling) की त्रुटि है, जिसे वे सुधरवाना चाहते हैं।
कमलाकांत राय की परेशानी कुछ यूँ रही:
- पहला चक्कर: पुराने निवास प्रमाण पत्र के कारण लौटाया गया।
- दूसरा चक्कर: आवासीय प्रमाण की जगह बैंक पासबुक मांगा गया, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया।
- तीसरा चक्कर: घंटों लाइन में लगने के बाद भी काम नहीं हुआ।
- चौथा चक्कर: उम्मीद लगाए खड़े हैं कि शायद इस बार काम हो जाए।
हाजीपुर और बक्सर से आ रही छात्राएं परेशान
सिर्फ कमलाकांत राय ही नहीं, बल्कि हजारों लोग ऐसी ही समस्याओं से जूझ रहे हैं। हाजीपुर से आई संजना ने बताया कि वह नवंबर में भी आई थी और रात 3 बजे लाइन में लगी थी। सुबह 8 बजे फॉर्म मिला और शाम 5 बजे काम कराकर लौटी। लेकिन, ललित भवन में जमा करने पर बताया गया कि “सरकार का नियम बदल गया है, फिर से करवा कर लाओ।” संजना सवाल करती हैं, “क्या छात्र-छात्राओं के पास और कोई काम नहीं है? बस इसी काम में हम लोग दौड़ते रहें?”
बक्सर से आई एक छात्रा की कहानी तो और भी दर्दनाक है। उसने बताया कि उसके आधार कार्ड का लिमिट पार कर गया है और इसे सही करवाने के लिए वह दो साल से घूम रही है। इस कारण वह दो साल से प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म नहीं भर पा रही है और किसी भी सरकारी योजना का लाभ भी नहीं मिल रहा है।
| समस्या का प्रकार | उदाहरण |
|---|---|
| नाम/वर्तनी त्रुटि | कमलाकांत राय (सेवानिवृत्त फौजी) |
| प्रमाण पत्रों की अस्वीकृति | पुराना निवास, बैंक पासबुक |
| लिमिट क्रॉस की समस्या | बक्सर की छात्रा (2 साल से परेशान) |
| बार-बार नियम बदलना | संजना (हाजीपुर) |
| समय की बर्बादी | घंटों कतार में, कई चक्कर लगाना |
अधिकारियों का दावा, हकीकत कुछ और
डाक विभाग के अधिकारियों का कहना है कि वे अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहे हैं और लोगों की सुविधा के लिए अतिरिक्त प्रयास भी किए जा रहे हैं। उनका दावा है कि वे हर संभव मदद दे रहे हैं।
लेकिन, हकीकत यह है कि जब तक आधार केंद्रों की संख्या नहीं बढ़ाई जाती, तकनीकी खामियों को दूर नहीं किया जाता और नियमों को सरल नहीं किया जाता, तब तक पटना जीपीओ पर उमड़ने वाली ये कतारें छोटी होने वाली नहीं हैं।
निष्कर्ष: जनता की परेशानी कब होगी दूर?
आधारकार्ड आज हर नागरिक के लिए सबसे महत्वपूर्ण पहचान पत्र बन चुका है। इसके बिना कोई भी सरकारी या निजी कार्य संभव नहीं है। ऐसे में इसमें सुधार करवाने की प्रक्रिया का इतना जटिल और समय लेने वाला होना लोगों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। सरकार और UIDAI को इस ओर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है ताकि आम जनता को इस परेशानी से मुक्ति मिल सके।



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