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पटना में गंगा स्नान के दौरान बड़ा हादसा: एक ही परिवार के 7 लोग डूबे, नाविकों ने 6 को बचाया, एक लड़की लापता

पटना। बिहार की राजधानी पटना के बाढ़ थाना क्षेत्र स्थित उमानाथ गंगा घाट पर शनिवार को एक बड़ा हादसा हो गया। श्राद्ध कर्म के बाद शुद्धिकरण के लिए आए एक ही परिवार के सात लोग गंगा नदी में डूबने लगे। राहत की बात यह रही कि मौके पर मौजूद नाविकों ने अपनी जान जोखिम में डालकर छह लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन एक लड़की अभी भी लापता है। लापता लड़की की तलाश के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

कैसे हुआ हादसा?

​मिली जानकारी के अनुसार, नवादा जिले के पकरीबरावां थाना क्षेत्र से एक परिवार अपने किसी संबंधी के श्राद्ध कर्म के बाद गंगा स्नान और शुद्धिकरण के लिए उमानाथ घाट पहुंचा था। घाट पर भीड़ अधिक होने के कारण परिवार के कुछ सदस्य नाव के जरिए गंगा के दूसरे किनारे (दियारा क्षेत्र) पर स्नान करने चले गए।

​उमानाथ घाट के सामने वाले किनारे पर कोई पक्का घाट नहीं बना है। वहां नदी का तल असमान है—कहीं पानी बहुत कम है, तो कहीं अचानक गहरा गड्ढा है। स्नान के दौरान परिवार की चार लड़कियां अचानक गहरे पानी में समाने लगीं और डूबने से बचने के लिए चिल्लाने लगीं।

बचाने गए 3 लोग भी संकट में फंसे

​लड़कियों को डूबता देख किनारे पर मौजूद एक महिला और दो अन्य पुरुष उन्हें बचाने के लिए तुरंत पानी में कूद पड़े। लेकिन गंगा की तेज धारा और पानी के दबाव के कारण स्थिति और बिगड़ गई। घबराहट में डूबती लड़कियों ने बचाने आए लोगों को कसकर पकड़ लिया, जिससे बचाने गए तीनों लोग भी पानी में डूबने लगे। देखते ही देखते एक साथ सात लोग मौत के मुंह में समाने लगे।

नाविकों की बहादुरी से बची छह जानें

​हादसे को देख आसपास मौजूद स्थानीय नाविक तुरंत अपनी नाव लेकर मौके पर पहुंचे। नाविकों ने कड़ी मशक्कत के बाद डूब रहे सात लोगों में से छह को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, परिवार की एक लड़की पानी की तेज धार में बह गई और लापता हो गई।

रेस्क्यू ऑपरेशन जारी

​घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम उमानाथ घाट पहुंच गई है। लापता लड़की की तलाश के लिए स्थानीय गोताखोरों और नाविकों की मदद ली जा रही है। पुलिस प्रशासन ने एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को भी सूचित कर दिया है।

प्रशासन की अपील: कच्चे घाटों पर न जाएं

​बाढ़ पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे स्नान के लिए केवल चिन्हित और पक्के घाटों का ही उपयोग करें। उमानाथ घाट के दूसरी ओर का किनारा अत्यंत खतरनाक है क्योंकि वहां पानी की गहराई का सटीक अंदाजा नहीं मिल पाता। सुरक्षा मानकों की अनदेखी ऐसे बड़े हादसों का कारण बनती है।

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