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नीतीश कुमार: 10 बार मुख्यमंत्री, कई बार पाला बदला… अब बिहार की सत्ता से विदाई और राज्यसभा की तैयारी

बिहार की राजनीति में एक युग का अंत होता दिख रहा है। ’25 से 30, फिर से नीतीश’ के नारे के साथ 2025 का चुनाव जीतने वाले नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री पद और विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। बिहार की सत्ता में सबसे लंबे समय तक रहने वाले मुख्यमंत्री अब केंद्र की राजनीति (राज्यसभा) की ओर रुख कर रहे हैं।

​आइए जानते हैं नीतीश कुमार के उस सफर के बारे में, जिसने उन्हें भारतीय राजनीति का ‘सुशासन बाबू’ और ‘पलटीमार’ जैसे विशेषण दिए।

​1. शून्य से शिखर तक: शुरुआती संघर्ष

​नीतीश कुमार का राजनीतिक सफर उतार-चढ़ाव भरा रहा है:

  • पहली हार: 1977 में उन्होंने पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और हार गए।
  • पहली जीत: 1985 में वह पहली बार विधायक बने।
  • केंद्र में धमक: 1989 में सांसद बने और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेल, कृषि और भूतल परिवहन जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय संभाले। रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने ‘तत्काल टिकट’ जैसी सुविधा शुरू की थी।

​2. मुख्यमंत्री पद की ‘दशमलव’ यात्रा (10 बार शपथ)

​नीतीश कुमार के नाम बिहार में सबसे ज्यादा 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने का अनूठा रिकॉर्ड है:

  • 2000: पहली बार केवल 7 दिन के लिए सीएम बने।
  • 2005-2013: भाजपा के साथ ‘सुशासन बाबू’ की छवि बनाई।
  • 2014: लोकसभा हार की जिम्मेदारी लेकर इस्तीफा दिया और जीतन राम मांझी को सीएम बनाया।
  • 2015: राजद के साथ ‘महाठबंधन’ बनाकर वापसी की।
  • 2017-2024: कई बार पाला बदला। कभी एनडीए (NDA) तो कभी महागठबंधन के साथ मिलकर सरकार बनाई।
  • 2025: 10वीं बार मुख्यमंत्री बने, लेकिन अब 2026 में इस्तीफा देकर राज्यसभा जा रहे हैं।

​3. पाला बदलने की टाइमलाइन: क्यों और कब?

​नीतीश कुमार की राजनीति में ‘यू-टर्न’ हमेशा चर्चा में रहा:

  • 2017: तेजस्वी यादव पर भ्रष्टाचार के आरोप लगने पर महागठबंधन छोड़ा और एनडीए में आए।
  • 2022: एनडीए छोड़ फिर से राजद के साथ गए।
  • 2024: महागठबंधन पर ‘गड़बड़ी’ का आरोप लगाकर फिर एनडीए में शामिल हुए।
  • 2026: अब एनडीए में रहते हुए ही पद छोड़ रहे हैं ताकि भाजपा अपना मुख्यमंत्री बना सके।

​4. पारिवारिक पृष्ठभूमि

  • जन्म: 1 मार्च 1951, बख्तियारपुर (बिहार)।
  • शिक्षा: मैकेनिकल इंजीनियरिंग (बिहार कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग)।
  • परिवार: पत्नी मंजू कुमारी सिन्हा (निधन 2007)। बेटा निशांत कुमार, जो हाल ही में जदयू में शामिल हुए हैं। उनके बड़े भाई सतीश कुमार खेती करते हैं और बहनें राजनीति से दूर हैं।

​5. ’25 से 30′ का नारा और हकीकत

​2025 के चुनाव में एनडीए ने नारा दिया था कि नीतीश 2030 तक सीएम रहेंगे। लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब बिहार में अपना मुख्यमंत्री चाहती थी। जदयू के ‘छोटे भाई’ की भूमिका में आने के बाद यह बदलाव तय माना जा रहा था। विपक्ष का वह दावा सच साबित हुआ जिसमें कहा गया था कि चुनाव के बाद नीतीश को हटा दिया जाएगा।

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