DMCH दरभंगा में भारी हंगामा: जूनियर डॉक्टरों और डेटा ऑपरेटर के बीच मारपीट, सेंट्रल पैथोलॉजी में कामकाज ठप
दरभंगा (बिहार): उत्तर बिहार के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थान, दरभंगा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (DMCH) से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। बुधवार को अस्पताल परिसर में जूनियर डॉक्टरों (UG छात्र) और एक डेटा ऑपरेटर के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस विवाद के बाद सेंट्रल पैथोलॉजी विभाग में कामकाज पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे दूर-दराज से आए मरीजों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
विवाद की शुरुआत: रजिस्ट्रेशन काउंटर पर तकरार
मिली जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत सेंट्रल पैथोलॉजी लैब के रजिस्ट्रेशन काउंटर पर हुई। बताया जा रहा है कि किसी बात को लेकर एक जूनियर डॉक्टर और डेटा ऑपरेटर सत्यम कुमार के बीच कहासुनी शुरू हुई। देखते ही देखते यह बहस मारपीट में बदल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच जमकर हाथापाई हुई। घटना के तुरंत बाद आरोपी डेटा ऑपरेटर सत्यम कुमार ड्यूटी छोड़कर मौके से फरार हो गया।
अधीक्षक की बड़ी कार्रवाई: डेटा ऑपरेटर बर्खास्त
हंगामे की सूचना मिलते ही DMCH के प्राचार्य डॉ. यू.सी. झा और अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा ने त्वरित कार्रवाई की और आरोपी डेटा ऑपरेटर सत्यम कुमार को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया।
हालांकि, इस कड़ी कार्रवाई के बावजूद जूनियर डॉक्टरों का गुस्सा शांत नहीं हुआ है। नाराज छात्र अभी भी कार्रवाई की प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर असंतुष्ट नजर आ रहे हैं।
पैथोलॉजी लैब में दोबारा हंगामा और मारपीट
प्रशासनिक कार्रवाई के कुछ समय बाद मामला तब और बिगड़ गया जब नाराज छात्रों का एक समूह दोबारा पैथोलॉजी लैब में घुस गया। वहां मौजूद एक अन्य कर्मी, उदयशंकर सिंह के साथ भी छात्रों की कहासुनी हुई, जो बाद में मारपीट में बदल गई। इस घटना के बाद से लैब के अन्य कर्मचारियों में भी डर का माहौल है और फिलहाल पैथोलॉजी जांच पूरी तरह बंद कर दी गई है।
मरीजों पर पड़ा बुरा असर
DMCH में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज जांच और इलाज के लिए पहुंचते हैं। सेंट्रल पैथोलॉजी बंद होने के कारण:
- ब्लड टेस्ट और बायोप्सी जैसी महत्वपूर्ण जांचें अटक गई हैं।
- गरीब मरीजों को निजी लैब का रुख करना पड़ रहा है, जो आर्थिक रूप से बोझिल है।
- ओपीडी में आए मरीजों को बिना रिपोर्ट के वापस लौटना पड़ रहा है।
अस्पताल प्रशासन का पक्ष
अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा ने कहा कि अस्पताल में अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए एक कमेटी गठित की जा सकती है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल, प्रशासन छात्रों को समझा-बुझाकर लैब सेवा बहाल करने की कोशिश कर रहा है।
निष्कर्ष और सुरक्षा पर सवाल
यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों के बीच इस तरह का विवाद हुआ हो। यह घटना अस्पताल के भीतर सुरक्षा व्यवस्था और स्टाफ के बीच समन्वय की कमी को उजागर करती है। जब तक स्थिति सामान्य नहीं होती, मरीजों का बेहाल होना तय है।



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