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​बिहार सियासत में ‘वीडियो’ युद्ध: दानिश रिजवान का तेजस्वी यादव पर पलटवार, FIR दर्ज कराने की दी चुनौती; जानें क्या है पूरा सच

पटना: बिहार की राजनीति में इन दिनों ‘वायरल वीडियो’ को लेकर जबरदस्त घमासान छिड़ा हुआ है। पूर्व एमएलसी और पूर्व प्रवक्ता दानिश रिजवान ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मामला एक वीडियो से जुड़ा है जिसमें दानिश रिजवान कथित तौर पर हथियार से फायरिंग करते दिख रहे हैं। दानिश का आरोप है कि तेजस्वी यादव ने उनकी छवि धूमिल करने के लिए AI (Artificial Intelligence) द्वारा निर्मित फर्जी वीडियो का सहारा लिया है।

​क्या है वायरल वीडियो का विवाद?

​हाल ही में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और फिर तेजस्वी यादव के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक वीडियो साझा किया गया। इस वीडियो में दानिश रिजवान एक वर्दीधारी व्यक्ति से पिस्तौल लेकर हवाई फायरिंग करते नजर आ रहे हैं।

​वीडियो पोस्ट करते हुए तेजस्वी यादव ने तीखा हमला बोला और लिखा कि पुलिस की पिस्तौल छीनकर फायरिंग करने वाला यह शख्स केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी का राजनीतिक सलाहकार है। तेजस्वी ने इस घटना को ‘मोदी प्रदत्त गुंडागर्दी’ करार देते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर भी निशाना साधा।

​दानिश रिजवान की सफाई: “यह 2018 का मामला और AI का खेल है”

​अमर उजाला से बातचीत में दानिश रिजवान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने वीडियो की सच्चाई बताते हुए कई अहम बिंदु रखे:

  1. पुराना मामला: दानिश के अनुसार यह वीडियो 2018 का है, जब उनके भाई की शादी थी। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने एयरगन से फायरिंग की थी, जिसके बाद तत्कालीन एसपी ने उनका लाइसेंस सस्पेंड कर दिया था। हालांकि, बाद में कोर्ट ने हथियार की जांच रिपोर्ट (जिसमें फायरिंग न होने की पुष्टि हुई) के आधार पर लाइसेंस बहाल कर दिया था।
  2. AI का इस्तेमाल: दानिश का दावा है कि वायरल हो रहे वीडियो को AI तकनीक से बदला गया है ताकि वह अधिक आपत्तिजनक दिखे। उन्होंने बताया कि इस मामले में उन्होंने पहले ही भोजपुर के नगर थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी, जिसमें पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया है। आरोपी ने कबूल किया है कि उसने AI से वीडियो बनाया था।
  3. शारीरिक बनावट और समय: दानिश ने तर्क दिया कि वीडियो में वह काफी पतले दिख रहे हैं, जबकि वर्तमान में उनका वजन काफी बढ़ गया है। साथ ही, वीडियो में दिख रहा पुलिसकर्मी अब एएसआई (ASI) बन चुका है, जिससे साफ है कि वीडियो कम से कम 10 साल पुराना है।

​”मैं अब ‘हम’ पार्टी में भी नहीं हूं”

​तेजस्वी यादव को आड़े हाथों लेते हुए दानिश ने कहा कि उन्हें बिना जानकारी के कुछ भी बोलने से बचना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह 2022 में ही हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) पार्टी छोड़ चुके हैं और वर्तमान में वह पार्टी के कार्यकर्ता तक नहीं हैं, सलाहकार होना तो दूर की बात है।

​तेजस्वी यादव पर FIR की तैयारी

​दानिश रिजवान ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी की छवि खराब करने के लिए एआई वीडियो का उपयोग करना अपराध है। उन्होंने घोषणा की है कि वह पहले से दर्ज प्राथमिकी में अब तेजस्वी यादव का नाम भी शामिल करवाएंगे। दानिश ने कहा, “आपको कोई हक नहीं है कि आप किसी का एआई फोटो या वीडियो बनाकर उसकी मर्यादा को ठेस पहुँचाएं। मैं इस मामले में कानूनी लड़ाई लड़ूंगा।”

​निष्कर्ष: तकनीक और राजनीति का खतरनाक मेल

​यह घटना दर्शाती है कि राजनीति में ‘डीपफेक’ और ‘एआई’ जैसी तकनीकें कितनी खतरनाक साबित हो सकती हैं। जहां विपक्ष इसे सत्ता पक्ष की गुंडागर्दी बता रहा है, वहीं संबंधित पक्ष इसे साजिश करार दे रहा है। अब गेंद पुलिस और अदालत के पाले में है कि वह इस डिजिटल साक्ष्य की सत्यता की जांच करे।

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