बिहार: सीएम नीतीश कुमार की अध्यक्षता में राहत कोष की 24वीं बैठक, 4.70 करोड़ रुपये की सहायता को मिली मंजूरी

पटना समाचार: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को ‘मुख्यमंत्री राहत कोष न्यासी परिषद’ की 24वीं बैठक आयोजित की गई। 1 अणे मार्ग स्थित ‘संकल्प सभागार’ में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में आपदा पीड़ितों, दुर्घटना में जान गंवाने वालों के परिजनों और समाज के वंचित वर्गों की सहायता के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राहत कोष का प्राथमिक उद्देश्य संकट की घड़ी में आम जनमानस को त्वरित आर्थिक संबल प्रदान करना है। इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि इस बैठक में किन-किन मदों में राशि स्वीकृत की गई और इससे आम जनता को क्या लाभ होगा।
राहत कोष से 4.70 करोड़ रुपये की बड़ी सहायता
बैठक का सबसे मुख्य बिंदु आपदा और दुर्घटनाओं में प्रभावित लोगों के लिए धन आवंटन रहा। परिषद ने कुल 4 करोड़ 70 लाख 50 हजार रुपये के खर्च को मंजूरी दी है। यह राशि मुख्य रूप से निम्नलिखित श्रेणियों में वितरित की जाएगी:
- राज्य के बाहर दुर्घटनाओं के लिए सहायता: बिहार के मूल निवासी जो राज्य के बाहर किसी दुर्घटना का शिकार हुए, उनके प्रति सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई है। राज्य के बाहर हुई अलग-अलग दुर्घटनाओं में जान गंवाने वाले 89 मृतकों के आश्रितों और 41 गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को आर्थिक मदद देने का निर्णय लिया गया है।
- राज्य के भीतर आपदा राहत: बिहार के भीतर विभिन्न प्राकृतिक और अन्य आपदाओं में अपनी जान गंवाने वाले 72 लोगों के परिजनों को अनुग्रह अनुदान देने के लिए राशि स्वीकृत की गई है।
बाढ़ पीड़ितों और शिविरों के लिए विशेष प्रावधान
बिहार में बाढ़ एक वार्षिक चुनौती है। बैठक में बाढ़ राहत शिविरों के प्रबंधन और वहां रहने वाले लोगों की सुविधाओं पर भी चर्चा हुई।
- शिविरों में बुनियादी सुविधाएं: राहत शिविरों में रहने वाले लोगों के लिए बर्तन और कपड़े खरीदने हेतु 38 लाख 19 हजार 70 रुपये के खर्च को परिषद ने कार्योत्तर स्वीकृति प्रदान की।
- शिविरों में नवजात शिशुओं की मदद: राहत शिविरों में जन्म लेने वाले बच्चों के लिए भी विशेष सहायता राशि के प्रावधान को मंजूरी दी गई, ताकि मुश्किल समय में भी बच्चों और माताओं को पोषण और सुरक्षा मिल सके।
बाल श्रम से मुक्त किशोरों का पुनर्वास
नीतीश सरकार ने सामाजिक सुधार की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए बाल श्रम से मुक्त कराए गए किशोरों (14 से 18 वर्ष) के भविष्य को संवारने का निर्णय लिया है।
- आर्थिक सहायता: मुक्त कराए गए किशोरों के पुनर्वास के लिए 25 हजार रुपये प्रति व्यक्ति की दर से सहायता दी जाएगी।
- कुल आवंटन: इस मद में कुल 86 लाख रुपये श्रम संसाधन विभाग को हस्तांतरित किए गए हैं। इसका उद्देश्य इन किशोरों को मुख्यधारा से जोड़ना और उन्हें शिक्षा या कौशल विकास की ओर प्रेरित करना है।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के कई कद्दावर मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे, जिनमें शामिल हैं:
- आपदा प्रबंधन मंत्री नारायण प्रसाद।
- मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार।
- पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार।
- अपर मुख्य सचिव अरविंद कुमार चौधरी और डॉ. बी. राजेन्दर।
- स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह एवं अन्य सचिव स्तर के अधिकारी।
मुख्यमंत्री का संबोधन: “त्वरित मदद ही प्राथमिकता”
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा, “मुख्यमंत्री राहत कोष केवल एक सरकारी फंड नहीं है, बल्कि यह संकट के समय बिहार के लोगों का सबसे बड़ा सहारा है। हमारा प्रयास है कि किसी भी आपदा या दुर्घटना की स्थिति में सहायता राशि बिना किसी देरी के सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचे।” उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कोष की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए।
निष्कर्ष
मुख्यमंत्री राहत कोष की 24वीं बैठक के निर्णय यह दर्शाते हैं कि सरकार न केवल आपदा प्रबंधन पर ध्यान दे रही है, बल्कि बाल श्रम जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ भी सक्रिय है। 4.70 करोड़ रुपये की यह मंजूरी बिहार के उन परिवारों के लिए एक नई उम्मीद की किरण है, जिन्होंने आपदाओं में अपने अपनों को खोया है।



Post Comment