Bihar News: 9 बार की जीत और अब डिप्टी सीएम की कमान, जानें बिजेंद्र प्रसाद यादव का ‘अजेय’ सियासी सफर
Bijendra Prasad Yadav Political Profile: बिहार की राजनीति में जब भी अनुभव, सादगी और अटूट भरोसे की बात होती है, तो एक नाम सबसे ऊपर उभर कर आता है— बिजेंद्र प्रसाद यादव। 15 अप्रैल 2026 को बिहार के राजनीतिक इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ा, जब 79 वर्षीय वरिष्ठ नेता बिजेंद्र यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
सुपौल जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े पद तक पहुँचने का उनका सफर संघर्ष और निरंतरता की अद्भुत मिसाल है।
सुपौल से लेकर सचिवालय तक: जेपी आंदोलन की उपज
बिजेंद्र प्रसाद यादव मूल रूप से सुपौल जिले के सरायगढ़ भपटियाही प्रखंड के मुरली गांव के रहने वाले हैं। उनकी राजनीतिक चेतना 1974 के प्रसिद्ध जेपी आंदोलन (छात्र आंदोलन) के दौरान जाग्रत हुई। जयप्रकाश नारायण के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने राजनीति में कदम रखा और जल्द ही अपनी पहचान एक जमीन से जुड़े नेता के रूप में बना ली। वे नीतीश कुमार के उन चुनिंदा साथियों में से हैं, जिन्होंने समता पार्टी के दौर से लेकर आज तक हर परिस्थिति में उनका साथ निभाया है।
लगातार 9 बार जीत का ‘अजेय’ रिकॉर्ड
बिहार की राजनीति में किसी एक ही सीट से लगातार 9 बार चुनाव जीतना कोई साधारण बात नहीं है। बिजेंद्र यादव ने सुपौल सदर विधानसभा सीट को अपना ऐसा अभेद्य किला बनाया है, जिसे विरोधी आज तक नहीं ढहा सके।
नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद ‘संकटमोचक’
बिजेंद्र यादव को नीतीश कुमार का ‘हनुमान’ या ‘संकटमोचक’ कहा जाता है। चाहे सरकार में विभागों का बंटवारा हो या गठबंधन की जटिलताएं, नीतीश कुमार हमेशा बिजेंद्र यादव की सलाह को प्राथमिकता देते हैं।
- अनुभव का खजाना: उन्होंने लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, नीतीश कुमार और जीतन राम मांझी—सभी मुख्यमंत्रियों के साथ मंत्री के रूप में काम किया है।
- महत्वपूर्ण मंत्रालय: उनके पास ऊर्जा (Energy) और वित्त (Finance) जैसे सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी रही है। बिहार के बिजली क्षेत्र में आए क्रांतिकारी सुधारों का श्रेय काफी हद तक बिजेंद्र यादव के कुशल प्रबंधन को जाता है।
क्यों बनाए गए उपमुख्यमंत्री?
सम्राट चौधरी सरकार में बिजेंद्र यादव को डिप्टी सीएम बनाने के पीछे कई बड़े राजनीतिक मायने हैं:
- अनुभव का संतुलन: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी युवा हैं, ऐसे में बिजेंद्र यादव का 35 वर्षों का प्रशासनिक अनुभव सरकार को स्थिरता प्रदान करेगा।
- जातीय समीकरण: यादव जाति से आने वाले बिजेंद्र यादव के जरिए एनडीए ने बिहार के सबसे बड़े वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।
- नीतीश कुमार की विरासत: चूँकि नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी को अपनी विरासत सौंपी है, ऐसे में बिजेंद्र यादव की मौजूदगी यह सुनिश्चित करेगी कि पुरानी सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं सुचारू रूप से चलती रहें।
सुपौल में जश्न का माहौल
बिजेंद्र यादव के उपमुख्यमंत्री बनने की खबर जैसे ही उनके गृह जनपद सुपौल पहुँची, पूरे जिले में दीपावली जैसा माहौल हो गया। मुरली गांव से लेकर सुपौल सदर तक समर्थकों ने मिठाइयां बांटीं और पटाखे फोड़े। स्थानीय लोगों का कहना है कि “बिजेंद्र बाबू ने हमेशा विकास की राजनीति की है और आज उन्हें उनकी तपस्या का फल मिला है।”
निष्कर्ष
79 वर्ष की आयु में भी बिजेंद्र प्रसाद यादव की सक्रियता युवाओं को प्रेरित करती है। एक साधारण कार्यकर्ता से उपमुख्यमंत्री पद तक का उनका सफर यह साबित करता है कि राजनीति में यदि आपकी जड़ें जनता से जुड़ी हों और नेतृत्व पर आपका भरोसा अटूट हो, तो सफलता के शिखर तक पहुँचने से कोई नहीं रोक सकता।
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