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Bihar News: मोतिहारी में ‘केला कांड’! SSB ने जब्त किया 7 लाख का माल, थानेदार और मजिस्ट्रेट ने बिना नीलामी चहेते को सौंपा; जांच शुरू

मोतिहारी (पूर्वी चम्पारण)। बिहार के मोतिहारी जिले में भ्रष्टाचार और प्रशासनिक मिलीभगत का एक अनोखा मामला सामने आया है। भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा बलों (SSB) द्वारा तस्करी के लिए जब्त किए गए हजारों कार्टून केले की नीलामी में ‘बड़ा खेल’ होने का आरोप लगा है। आरोप है कि स्थानीय झरोखर थाने के थानाध्यक्ष और मौके पर तैनात मजिस्ट्रेट ने सरकारी नियमों को ताक पर रखकर खुली नीलामी के बजाय अपने पसंदीदा व्यापारी को माल सौंप दिया।

क्या है पूरा मामला?

​घटना की शुरुआत 15 मार्च की रात से होती है, जब SSB (सशस्त्र सीमा बल) ने पीठवा गांव के समीप भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी के उद्देश्य से जमा किए गए 1860 कार्टून कच्चे केले जब्त किए थे। प्रत्येक कार्टून का वजन लगभग 13.5 किलो था और बाजार में इसकी अनुमानित कीमत करीब 7.44 लाख रुपये आंकी गई थी। नियमानुसार, जब्ती के बाद माल को झरोखर थाना पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया था।

नियमों की धज्जियां: न बोली लगी, न पारदर्शिता

​कानूनन, जब्त किए गए सामान की नीलामी मजिस्ट्रेट की उपस्थिति में स्थानीय व्यापारियों के बीच खुली बोली (Open Bidding) लगाकर की जानी चाहिए। सबसे ऊंची बोली लगाने वाले को माल दिया जाता है और राशि तुरंत सरकारी खजाने (अंचल नजारत) में जमा होती है।

​लेकिन इस मामले में आरोप है कि न तो कोई ढिंढोरा पिटवाया गया और न ही व्यापारियों को बुलाया गया। थानाध्यक्ष और मजिस्ट्रेट ने आपसी मिलीभगत से एक अज्ञात व्यापारी को ‘जिम्मेनामा’ पर सारा माल थमा दिया।

12 दिन बाद भी सरकारी खजाना खाली

​इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि नीलामी (या कथित हस्तांतरण) के 12 दिन बीत जाने के बाद भी एक रुपया भी सरकारी खाते में जमा नहीं हुआ है। इससे साफ जाहिर होता है कि प्रक्रिया में भारी अनियमितता बरती गई है।

थानेदार और मजिस्ट्रेट की दलीलें

​जब इस बारे में झरोखर थानाध्यक्ष असलम अंसारी से पूछा गया, तो उन्होंने अजीबोगरीब तर्क दिया। उन्होंने कहा, “केला खराब होने वाला सामान है, इसलिए उसे एक व्यापारी को दे दिया गया। उस बेचारे का भी 500 कार्टून सड़ गया है, जैसे ही बिकेगा पैसा जमा कर देगा।” हालांकि, थानाध्यक्ष ने उस ‘बेचारे’ व्यापारी का नाम बताने से साफ इनकार कर दिया।

​वहीं, मजिस्ट्रेट के तौर पर तैनात घोड़ासहन बीडीओ चंदन जायसवाल ने पल्ला झाड़ते हुए कहा कि वे वहां गए तो थे, लेकिन आगे क्या हुआ इसकी जानकारी थानाध्यक्ष ही दे सकते हैं।

SDM ने लिया संज्ञान

​मामला तूल पकड़ते ही सीकरहना एसडीएम विजय कुमार ने सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि जब्त माल की नीलामी प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव और राशि जमा न होना गंभीर विषय है। पूरे मामले की गहन जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

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