बिहार फ्लोर टेस्ट: सम्राट चौधरी सरकार के लिए कल का दिन ‘अग्निपरीक्षा’, क्या तेजस्वी यादव पलट पाएंगे बाजी?
पटना। बिहार की राजनीति में 24 अप्रैल की तारीख बेहद महत्वपूर्ण होने जा रही है। 15 अप्रैल को बिहार की कमान संभालने वाले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को कल विधानसभा के विशेष सत्र में अपना बहुमत साबित करना होगा। जहाँ एक तरफ एनडीए (NDA) खेमा अपनी जीत के प्रति आश्वस्त दिख रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की रणनीति पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं।
बहुमत का गणित: सम्राट चौधरी के लिए कितनी मुश्किल?
राजनीतिक समीकरणों को देखें तो सम्राट चौधरी के लिए फ्लोर टेस्ट की राह फिलहाल आसान नजर आ रही है। बांकीपुर विधानसभा सीट खाली होने के कारण अब सदन की प्रभावी संख्या कम हो गई है। एनडीए के पास पर्याप्त विधायकों का समर्थन है।
- तैयारी: एनडीए के सभी विधायकों को आज शाम तक पटना पहुंचने का निर्देश दिया गया है।
- रणनीति: कल सुबह 11:00 बजे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सदन पहुंचेंगे। उनके साथ उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र यादव समेत एनडीए के सभी दिग्गज नेता मौजूद रहेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि 201 विधायकों के प्रभावी संख्या बल के बीच सम्राट चौधरी आसानी से बहुमत का आंकड़ा पार कर लेंगे।
तेजस्वी यादव के लिए भी बड़ी परीक्षा
यह फ्लोर टेस्ट केवल सरकार के लिए ही नहीं, बल्कि तेजस्वी यादव के लिए भी अग्निपरीक्षा है। याद रहे कि 12 फरवरी 2024 को जब नीतीश सरकार का फ्लोर टेस्ट हुआ था, तब तेजस्वी यादव ने ‘खेला होने’ का दावा किया था। लेकिन तब पासा उल्टा पड़ गया था और राजद (RJD) के ही कुछ विधायक एनडीए के पाले में चले गए थे।
इस बार तेजस्वी यादव पहले से कहीं अधिक सक्रिय और हमलावर हैं। नई सरकार बनने के बाद से ही वे लगातार सम्राट चौधरी सरकार की नीतियों पर सवाल उठा रहे हैं। 35 विधायकों वाले महागठबंधन (RJD, कांग्रेस और वाम दल) के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि वे सदन के भीतर सरकार को घेरने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं। क्या तेजस्वी इस बार एनडीए के भीतर कोई सेंधमारी कर पाएंगे? यह कल साफ हो जाएगा।
भाजपा के भीतर ‘फाइल’ अटकी: मंत्रिमंडल विस्तार की चुनौती
सम्राट चौधरी के सामने केवल बहुमत साबित करने की ही चुनौती नहीं है, बल्कि मंत्रिमंडल का विस्तार भी एक बड़ा सिरदर्द बना हुआ है। सूत्रों के अनुसार, सम्राट चौधरी दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन मंत्रियों की सूची पर अंतिम मुहर नहीं लग पाई है।
- जदयू और अन्य दल: नीतीश कुमार की जदयू, उपेंद्र कुशवाहा, चिराग पासवान और जीतन राम मांझी की पार्टियों की ओर से मंत्रियों के नाम लगभग तय हैं।
- भाजपा का पेंच: असली मामला भाजपा के भीतर ही फंसा हुआ है। सबसे बड़ा सवाल विजय सिन्हा को लेकर है। पिछली सरकार में वे सम्राट चौधरी के समकक्ष उपमुख्यमंत्री थे। अब सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री बन गए हैं और डिप्टी सीएम के दोनों पद जदयू के कोटे में चले गए हैं। ऐसे में विजय सिन्हा जैसे कद्दावर नेता को कौन सा विभाग दिया जाए, इस पर दिल्ली दरबार में विमर्श जारी है। चर्चा है कि उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार जैसे भारी-भरकम विभाग की जिम्मेदारी दी जा सकती है।
निष्कर्ष
कल का फ्लोर टेस्ट बिहार की नई सरकार की स्थिरता की नींव रखेगा। यदि सम्राट चौधरी आसानी से बहुमत साबित कर देते हैं, तो उनका ध्यान जल्द से जल्द मंत्रिमंडल विस्तार और विकास कार्यों पर होगा। वहीं, तेजस्वी यादव के लिए यह अपनी खोई हुई साख वापस पाने और विपक्ष की एकता दिखाने का एक बड़ा मौका है। बिहार की जनता और राजनीतिक पंडितों की नजरें अब कल सुबह 11 बजे शुरू होने वाले विधानसभा सत्र पर टिकी हैं।



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