Loading Now

​औरंगाबाद: शादी की खुशियां मातम में बदलीं; NH-19 पर ट्रक से टकराई तेज रफ्तार कार, दो दोस्तों की दर्दनाक मौत

तिलक की खुशी अभी थमी भी नहीं थी कि उजड़ गए दो घर

औरंगाबाद (बिहार)। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-19 (NH-19) पर मंगलवार दोपहर एक ऐसी चीख गूंजी जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। मदनपुर थाना क्षेत्र के सढ़ैल और रानीकुआं गांव के बीच एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर ट्रक के पीछे जा घुसी। इस भीषण हादसे में दो होनहार युवकों की जान चली गई, जबकि तीन अन्य जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।

कैसे हुआ हादसा?

​घटना के पीछे की कहानी बेहद मार्मिक है। सढ़ैल निवासी हर्षित कुमार (21) के घर में उसकी फुआ की शादी की तैयारियां चल रही थीं। सोमवार रात ही पूरा परिवार गया जिले के बेलवां गांव से तिलक समारोह संपन्न कर लौटा था। मंगलवार दोपहर हर्षित अपने दोस्तों—युवराज सिंह (22), उत्कर्ष, उमंग और पीयूष के साथ शादी के लिए सब्जियां और अन्य जरूरी सामान लेने शिवगंज जा रहा था।

​जैसे ही इनकी कार एनएच-19 पर पहुंची, रफ्तार के कारण वाहन अनियंत्रित हो गया और आगे चल रहे ट्रक से पीछे से टकरा गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया।

मृतकों और घायलों की स्थिति

​स्थानीय लोगों और मदनपुर पुलिस की मदद से सभी को तत्काल औरंगाबाद सदर अस्पताल ले जाया गया।

  • मृतक: युवराज सिंह उर्फ आतिश और हर्षित कुमार उर्फ अर्श ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।
  • घायल: उत्कर्ष, उमंग और पीयूष की हालत गंभीर देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद हायर सेंटर रेफर कर दिया है।

ट्रक चालक फरार, पुलिस जांच जारी

​हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन लेकर मौके से भागने में सफल रहा। मदनपुर थाना पुलिस ने दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और फरार ट्रक की तलाश के लिए टोल प्लाजा और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।

सड़क सुरक्षा: एक बड़ी चिंता (Road Safety Alert)

​नेशनल हाईवे पर होने वाले हादसों में अक्सर ‘रियर-एंड कोलिजन’ (पीछे से टक्कर) का कारण तेज रफ्तार और सुरक्षित दूरी (Tailgating) न बनाए रखना होता है।

सावधानीक्यों जरूरी है?
रफ्तार पर नियंत्रणहाईवे पर अचानक ब्रेक लगने की स्थिति में वाहन को संभालने का समय मिलता है।
सुरक्षित दूरीआगे चल रहे वाहन से कम से कम 2-3 सेकंड की दूरी बनाए रखें।
सीट बेल्टऐसे हादसों में सीट बेल्ट जान बचाने में सबसे प्रभावी साबित होती है।
Previous post

बिहार में औद्योगिक क्रांति: 10 नई इकाइयों को मिली जमीन, ₹94 करोड़ के निवेश से 2000 युवाओं को मिलेगा रोजगार

Next post

बिहार में स्व-गणना का ‘डिजिटल धमाका’: 4 दिनों में 3.70 लाख परिवारों ने दर्ज किया विवरण, वैशाली जिला सबसे आगे

Post Comment

You May Have Missed