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पटना के बड़े अस्पताल की खौफनाक करतूत: हर्निया बताकर निकाल ली बच्चेदानी, स्वास्थ्य विभाग ने लिया कड़ा एक्शन

पटना। बिहार की राजधानी पटना से चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाली एक गंभीर घटना सामने आई है। यहाँ के एक प्रतिष्ठित निजी अस्पताल पर आरोप लगा है कि उसने इलाज के नाम पर न केवल धोखाधड़ी की, बल्कि एक महिला मरीज के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करते हुए हर्निया के ऑपरेशन के बहाने उसकी बच्चेदानी (गर्भाशय) निकाल ली। इस मामले में त्वरित संज्ञान लेते हुए बिहार स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के खिलाफ बड़ी दंडात्मक कार्रवाई की है।

आयुष्मान भारत योजना का निबंधन रद्द

​मामला पटना के एवर्स अस्पताल (Evers Hospital) से जुड़ा है। स्वास्थ्य विभाग ने इस अस्पताल की इस अमानवीय करतूत के सामने आने के बाद ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के तहत इसका निबंधन (Registration) तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। विभाग द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल पर जाली मेडिकल रिपोर्ट तैयार करने और मरीज को अंधेरे में रखकर गलत सर्जरी करने के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।

क्या है पूरा मामला?

​शिकायत के अनुसार, एक महिला मरीज को हर्निया की समस्या बताकर अस्पताल में भर्ती किया गया था। अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान योजना के तहत ‘हर्निया पैकेज’ में मरीज की बुकिंग की। लेकिन हर्निया का ऑपरेशन करने के बजाय, डॉक्टरों ने महिला का गर्भाशय (Hysterectomy) निकाल दिया।

जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे:

  • जाली रिपोर्ट: अस्पताल ने सर्जरी को सही ठहराने के लिए फर्जी मेडिकल दस्तावेज तैयार किए थे।
  • योजना का दुरुपयोग: सरकारी धन हड़पने के लिए आयुष्मान भारत योजना के नियमों का घोर उल्लंघन किया गया।
  • गंभीर अनियमितताएं: सिविल सर्जन की जांच में अस्पताल के कामकाज और रिकॉर्ड कीपिंग में कई अन्य खामियां भी पाई गईं।

सिविल सर्जन की रिपोर्ट पर हुई कार्रवाई

​पटना के सिविल सर्जन द्वारा प्रस्तुत विस्तृत जांच प्रतिवेदन के आधार पर स्वास्थ्य विभाग ने यह कड़ा कदम उठाया है। सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि जांच में यह साबित हुआ है कि अस्पताल ने जानबूझकर गलत सर्जरी की और सरकारी योजना का दुरुपयोग किया। विभाग ने अब अस्पताल के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ आवश्यक कानूनी प्रक्रिया (FIR) भी शुरू कर दी है।

मुख्य जानकारीविवरण
अस्पताल का नामएवर्स अस्पताल, पटना
आरोपहर्निया बताकर बच्चेदानी निकालना
कार्रवाईआयुष्मान भारत निबंधन रद्द एवं कानूनी प्रक्रिया शुरू
जांचकर्तासिविल सर्जन, पटना

मरीजों की सुरक्षा पर उठते सवाल

​यह घटना बिहार के निजी अस्पतालों में चल रहे ‘ऑपरेशन सिंडिकेट’ और सरकारी योजनाओं के नाम पर होने वाली लूट की ओर इशारा करती है। गरीब मरीजों के लिए संजीवनी मानी जाने वाली आयुष्मान योजना का इस तरह से दुरुपयोग होना बेहद चिंताजनक है। स्वास्थ्य विभाग ने साफ कर दिया है कि मरीजों की जान और सम्मान के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा।

निष्कर्ष: आगे क्या?

​एवर्स अस्पताल पर हुई इस कार्रवाई से राजधानी के अन्य निजी अस्पतालों में भी हड़कंप मच गया है। स्वास्थ्य विभाग अब उन सभी अस्पतालों की सूची तैयार कर रहा है जहाँ आयुष्मान कार्ड के तहत असामान्य रूप से अधिक गर्भाशय निकालने की सर्जरी की गई है।

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