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Bihar: क्लासरूम को बेडरूम समझ बैठे गुरुजी! प्रभारी शिक्षक लेते रहे खर्राटे, मैदान में क्रिकेट खेलते रहे बच्चे; वीडियो वायरल होने पर मचा हड़कंप।

भूमिका
​बिहार की शिक्षा व्यवस्था अक्सर अपनी बदहाली और शिक्षकों की अजीबोगरीब हरकतों को लेकर चर्चा में रहती है। ताजा मामला राजधानी पटना के बाढ़ अनुमंडल से सामने आया है, जहाँ एक प्राथमिक विद्यालय के प्रभारी शिक्षक क्लासरूम को बेडरूम समझकर गहरी नींद में सोते पाए गए। गुरुजी की इस ‘सुखद निद्रा’ का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने शिक्षा विभाग की मॉनिटरिंग और शिक्षकों की नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
​क्या है पूरा मामला?
​मामला बाढ़ अनुमंडल के इब्राहिमपुर नयाटोला प्राथमिक विद्यालय का है। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि विद्यालय के प्रभारी शिक्षक क्लासरूम के भीतर आराम फरमा रहे हैं। जिस समय गुरुजी को बच्चों को भविष्य का पाठ पढ़ाना चाहिए था, उस समय वे बेंच-कुर्सी का सहारा लेकर झपकी ले रहे थे।
​हैरानी की बात यह है कि शिक्षक महोदय को इस बात का भी आभास नहीं हुआ कि उनकी इस लापरवाही को ग्रामीण कैमरे में कैद कर रहे हैं।
​मैदान में सज गई क्रिकेट की पिच
​एक तरफ प्रभारी शिक्षक क्लासरूम में सो रहे थे, वहीं दूसरी तरफ स्कूल के मासूम बच्चे पढ़ाई छोड़कर स्कूल परिसर के मैदान में क्रिकेट खेलने में व्यस्त थे। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल में कोई भी अनुशासन नहीं बचा है। जब मुख्य शिक्षक ही सो रहे हों, तो बच्चों पर लगाम कसने वाला कोई नहीं रहा। ग्रामीणों ने जब स्कूल का यह नजारा देखा, तो वे दंग रह गए और खुद वीडियो बनाकर इसे सार्वजनिक करने का निर्णय लिया।
​जनगणना ड्यूटी का बहाना और लापरवाही
​जानकारी के अनुसार, इन दिनों बिहार में कई शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगी हुई है। स्कूल में शिक्षकों की संख्या कम होने के कारण पूरी जिम्मेदारी प्रभारी शिक्षक के कंधों पर थी। ग्रामीणों का कहना है कि जैसे ही अन्य शिक्षक जनगणना के काम से बाहर निकलते हैं, प्रभारी महोदय क्लासरूम में अपना बिस्तर (सोने का जुगाड़) लगा लेते हैं। अभिभावकों का कहना है कि वे अपने बच्चों को बड़ी उम्मीदों के साथ स्कूल भेजते हैं, लेकिन वहाँ पढ़ाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति हो रही है।
​विवादों से पुराना नाता है गुरुजी का
​यह पहली बार नहीं है जब इब्राहिमपुर नयाटोला स्कूल के ये प्रभारी शिक्षक चर्चा में आए हों। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इनका व्यवहार पहले भी संदिग्ध रहा है।
​महिला से मारपीट: कुछ समय पहले भी इनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वे स्कूल परिसर में एक महिला को छड़ी से पीटते नजर आए थे।
​प्रशासनिक उदासीनता: पिछले मामले में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (BEO) ने कार्रवाई के लिए विभाग को पत्र भी लिखा था, लेकिन कोई बड़ी कार्रवाई न होने के कारण शिक्षक के हौसले बुलंद रहे।
​शिक्षा विभाग का रुख: ‘होगी कठोर कार्रवाई’
​वीडियो वायरल होने के बाद विभाग की नींद भी टूटी है। बाढ़ के BEO अमित कुमार ने मामले को संज्ञान में लेते हुए कहा कि स्कूल प्रबंधन को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ड्यूटी के दौरान सोना एक गंभीर अनुशासनहीनता है। इस मामले की गहन जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट के आधार पर आरोपी शिक्षक के खिलाफ निलंबन जैसी कठोर कार्रवाई की जाएगी।
​निष्कर्ष
​बिहार में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर ऐसे लापरवाह शिक्षक पूरी व्यवस्था को पलीता लगा रहे हैं। जब तक ऐसे शिक्षकों पर सख्त एक्शन नहीं लिया जाता, तब तक सरकारी स्कूलों के बच्चों का भविष्य इसी तरह ‘मैदान में क्रिकेट’ और ‘क्लासरूम में नींद’ के बीच झूलता रहेगा।

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