खाकी में भी नीतीश की पसंद, खादी में भी; मंत्री की शपथ ले रहे सुनील कुमार की संपत्ति इतनी कम!
Bihar Cabinet: खाकी में भी नीतीश की पसंद, खादी में भी; मंत्री की शपथ ले रहे सुनील कुमार की संपत्ति इतनी कम!
न्यूदज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज Published by: सारण ब्यूरो Updated Thu, 07 May 2026 12:34 PM IST
सार
Bihar: बिहार की राजनीति में कुछ नाम अपनी सादगी और प्रशासनिक अनुभव के कारण अलग पहचान रखते हैं। इन्हीं नामों में से एक हैं सुनील कुमार। वह जनता दल की टिकट पर भोरे विधानसभा सीट से दूसरी बार के विधायक हैं।

बिहार सरकार के मंत्री सुनील कुमार – फोटो : अमर उजालाविज्ञापन
विस्तार
बिहार की राजनीति में कुछ नाम अपनी सादगी और प्रशासनिक अनुभव के कारण अलग पहचान रखते हैं। इन्हीं नामों में से एक हैं सुनील कुमार। भोरे विधानसभा सीट से जदयू के टिकट पर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज करने वाले सुनील कुमार एक बार फिर नए मंत्रिमंडल में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे हैं। यह महज एक विधायक की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे व्यक्तित्व का सफर है जिसने खाकी वर्दी की धमक के बाद अब खादी की चमक में भी खुद को साबित कर दिया है।
प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक विरासत का संगम
सुनील कुमार का राजनीति में आना कोई इत्तफाक नहीं था, बल्कि यह एक समृद्ध राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने का कदम था। उनके पिता चंद्रिका राम और भाई अनिल कुमार भी भोरे विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। साल 2020 में डीजी पद से सेवानिवृत्त होने के बाद सुनील कुमार ने अपने भाई अनिल कुमार की राजनीतिक विरासत संभालते हुए जदयू का दामन थामा। पहली ही बार में जनता ने उन्हें सिर-आंखों पर बिठाया और विधानसभा पहुंचाया।
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नीतीश कुमार के भरोसेमंद सिपाही
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की गुड बुक में सुनील कुमार का नाम हमेशा ऊपर रहा है। इसके पीछे कई ठोस कारण हैं। पुलिस विभाग में लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उन पर कभी कोई दाग नहीं लगा। एक पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारी होने के नाते वे अपनी कार्यशैली में बेहद अनुशासित और सटीक माने जाते हैं। गोपालगंज जिले की भोरे सुरक्षित सीट पर उनकी मजबूत पकड़ जदयू के लिए बड़ा प्लस पॉइंट मानी जाती है।
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क्यों अहम है मंत्रिमंडल में उनकी वापसी?
जब कोई पूर्व डीजी रैंक का अधिकारी राजनीति में आता है, तो उससे कानून-व्यवस्था को लेकर उम्मीदें काफी बढ़ जाती हैं। पिछले कार्यकाल में भी उन्होंने अपनी प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया था। अब नए मंत्रिमंडल में उनका शामिल होना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि सरकार अनुभवी चेहरों पर दांव लगाकर शासन को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना चाहती है।
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भोरे की जनता की उम्मीदें
लगातार दूसरी जीत ने यह साफ कर दिया है कि भोरे की जनता को सुनील कुमार की कार्यशैली पसंद आई है। शिक्षा, स्वास्थ्य और इलाके के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जिम्मेदारी अब एक बार फिर उनके कंधों पर होगी। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उन्हें इस बार भी कोई महत्वपूर्ण विभाग सौंपा जा सकता है, ताकि वे अपने प्रशासनिक अनुभव का लाभ सीधे जनता तक पहुंचा सकें।

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