बिहार: ड्यूटी के दौरान स्टोरकीपर की मौत, भतीजी की विदाई के बाद घर पहुँचा शव; खुशियाँ मातम में बदलीं
नालंदा (बिहार): नियति का क्रूर खेल किसे कहते हैं, इसका एक हृदयविदारक उदाहरण नालंदा जिले में देखने को मिला। जहाँ एक घर में बेटी की शादी की शहनाइयाँ गूँज रही थीं और बारातियों का स्वागत हो रहा था, वहीं परिवार का एक अहम सदस्य ड्यूटी के दौरान हमेशा के लिए खामोश हो गया।
1. ड्यूटी के दौरान संदिग्ध मौत
घटना बिहार थाना क्षेत्र स्थित बिजली विभाग के सर्किल ऑफिस की है। यहाँ तैनात स्टोरकीपर सुदिल पासवान (53) बुधवार रात अपनी ड्यूटी कर रहे थे। अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। कार्यालय में मौजूद सहकर्मी उन्हें आनन-फानन में अस्पताल ले गए, लेकिन अस्पताल पहुँचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने जाँच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।
2. शादी वाले घर में छिपाया गया ‘दुख’
मृतक सुदिल पासवान भागन विगहा ओपी क्षेत्र के बोकना गांव के रहने वाले थे। उनके भाई उपेंद्र पासवान की बेटी की शादी थी और घर पर बारात आई हुई थी।
- एक कठिन फैसला: जब रात में सुदिल की मौत की खबर घर पहुँची, तो परिवार के बड़े-बुजुर्गों ने पत्थर के दिल से एक बड़ा फैसला लिया। उन्होंने यह खबर दुल्हन और अन्य मेहमानों से छिपाए रखी ताकि शादी की रस्में बिना किसी बाधा के पूरी हो सकें।
- विदाई के बाद कोहराम: बेटी की विदाई होने तक परिवार ने अपने आँसू रोक कर रखे। जैसे ही डोली विदा हुई, घर में मौत की खबर दी गई, जिसके बाद पूरे गांव में सन्नाटा पसर गया।
3. हार्ट अटैक की आशंका
मृतक के भाई मधुसूदन पासवान ने बताया कि सुदिल पूरी तरह स्वस्थ थे और उन्हें कोई पुरानी बीमारी नहीं थी।
- अचानक बिगड़ी हालत: रात 10 बजे ड्यूटी खत्म कर वे भतीजी की शादी में शामिल होने घर आने वाले थे।
- अनाथ हुआ परिवार: सुदिल अपने पीछे चार बेटों और एक बेटी का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिजनों का मानना है कि काम के तनाव या अचानक किसी वजह से उन्हें हार्ट अटैक आया होगा।
4. पुलिस की कार्रवाई
बिहार थाना पुलिस ने मौके पर पहुँचकर शव को कब्जे में लिया और पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई।
- थानाध्यक्ष का बयान: बिहार थानाध्यक्ष सम्राट दीपक ने बताया कि प्रथम दृष्टया यह मामला कार्डियक अरेस्ट (हार्ट अटैक) का लग रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह साफ हो पाएगी। फिलहाल कागजी प्रक्रिया पूरी कर शव परिजनों को सौंप दिया गया है।
5. कर्तव्य और संवेदनाओं के बीच
सुदिल पासवान की मौत ने बिजली विभाग के उनके साथियों को भी झकझोर दिया है। एक तरफ जहाँ वे अपनी सरकारी ड्यूटी निभा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ उनका परिवार उनके घर लौटने का इंतजार कर रहा था। परिवार द्वारा शादी की रस्में पूरी होने तक मौत की खबर छिपाना, भारतीय समाज में संस्कारों और रिश्तों की गहराई को दर्शाता है।
निष्कर्ष
यह घटना हमें जीवन की अनिश्चितता की याद दिलाती है। सुदिल पासवान का जाना न केवल बिजली विभाग के लिए एक क्षति है, बल्कि उनके परिवार के लिए एक ऐसा घाव है जो शायद कभी नहीं भरेगा।
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