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पटना के पास बस रहा नया शहर, 2027 तक बनकर होगा तैयार, 33 हजार एकड़ में बसेगा हरिहरनाथपुरम टाउनशिप

Bihar: बिहार सरकार ने शहरी विस्तार को नियंत्रित करने और आधुनिक सुविधाओं वाले नए शहर बसाने के लिए हरिहर क्षेत्र सोनपुर में ‘हरिहरनाथपुरम’ नाम से ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना शुरू की है। यह परियोजना लैंड पूलिंग मॉडल पर आधारित होगी, जिसमें जमीन मालिकों को विकसित प्लॉट लौटाए जाएंगे।

Hariharanathapuram Township spread over 33,000 acres will be completed by 2027

हरिहरनाथ – फोटो : सोशल मीडियाविज्ञापन

विस्तार

बिहार में तेजी से बढ़ती शहरी आबादी और अनियोजित विस्तार को देखते हुए राज्य सरकार ने सुनियोजित योजना के तहत नए शहर बसाने की कवायद शुरू कर दी है। इसी कड़ी में सारण, वैशाली और राजधानी पटना के त्रिकोण पर स्थित हरिहर क्षेत्र सोनपुर सहित राज्य के 11 प्रमुख शहरों के आसपास ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसे लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग ने चिन्हित क्षेत्रों की चौहद्दी तय करते हुए वहां जमीन की खरीद-बिक्री, हस्तांतरण और निर्माण कार्यों पर फिलहाल रोक लगा दी है, जो मास्टर प्लान तैयार होने तक लागू रहेगी।

हरिहरनाथपुरम के नाम से मिलेगी नई पहचान
बिहार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और गौरवशाली धरती हरिहर क्षेत्र को आधुनिक शहरी स्वरूप देने की यह पहल राज्य के शहरी विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है। इससे न केवल शहरों पर बढ़ते दबाव को कम किया जा सकेगा, बल्कि रोजगार, निवेश और बुनियादी सुविधाओं के नए अवसर भी पैदा होंगे। सोनपुर के पास प्रस्तावित हरिहरनाथपुर टाउनशिप विशेष रूप से इस क्षेत्र को नई पहचान देगा।विज्ञापन

भौगोलिक विस्तार और परियोजना का दायरा
प्रस्तावित टाउनशिप स्टेशन से लगभग 6 किलोमीटर और प्रस्तावित एयरपोर्ट से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगी। इसके कोर क्षेत्र का विस्तार लगभग 2000 एकड़ और विशेष क्षेत्र का विस्तार करीब 33 हजार एकड़ निर्धारित किया गया है। इस परियोजना में सोनपुर के 42 ग्रामीण क्षेत्र और 6 शहरी वार्ड, दरियापुर के 98, परसा के 2 और दिघवारा के 4 गांव शामिल किए गए हैं। राज्य सरकार ने इसे ‘हरिहरनाथपुरम’ नाम से विकसित करने का निर्णय लिया है और 31 मार्च 2027 तक इसका मास्टर प्लान तैयार किया जाएगा।विज्ञापन

लैंड पूलिंग मॉडल से होगा विकास
सरकार इस टाउनशिप को पारंपरिक भूमि अधिग्रहण के बजाय ‘लैंड पूलिंग मॉडल’ के माध्यम से विकसित कर रही है। इस मॉडल में सरकार और जमीन मालिक साझेदार के रूप में काम करते हैं। किसानों से उनकी अविकसित जमीन ली जाती है और विकास के बाद 55 प्रतिशत हिस्सा प्लॉट के रूप में उन्हें वापस कर दिया जाता है, जबकि शेष 45 प्रतिशत जमीन सड़क, पार्क, ड्रेनेज, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए उपयोग की जाती है।

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जमीन मालिकों को विकसित जमीन का लाभ
सरकार का लक्ष्य इन टाउनशिप को आधुनिक और स्मार्ट शहरों की तर्ज पर विकसित करना है। मास्टर प्लान के तहत चौड़ी सड़कें, अंडरग्राउंड बिजली और ड्रेनेज सिस्टम, आईटी पार्क, लॉजिस्टिक हब, अस्पताल, स्कूल और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही कुल क्षेत्र का एक हिस्सा हरित क्षेत्र, पार्क और स्टेडियम के लिए आरक्षित रहेगा। फिलहाल इन क्षेत्रों में जमीन की खरीद-बिक्री पूरी तरह बंद है और कोई आधिकारिक दर तय नहीं की गई है। सरकार का कहना है कि विकसित होने के बाद जमीन की कीमत कई गुना बढ़ेगी और जमीन मालिकों को नकद मुआवजे के बजाय विकसित प्लॉट के रूप में अधिक लाभ मिलेगा।

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