Bihar News: साइबर प्रहार 3.0 से कांपे ठग; 5036 म्यूल अकाउंट्स का खुलासा, 22 बैंकों के अधिकारी भी जांच के घेरे में
पटना/भागलपुर: बिहार पुलिस की ‘साइबर क्राइम एंड सोशल मीडिया यूनिट’ (CSMU) ने राज्य में बढ़ते डिजिटल फ्रॉड पर लगाम लगाने के लिए अपनी सबसे बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। ‘साइबर प्रहार 3.0’ के तहत पुलिस ने एक साथ हजारों खातों पर शिकंजा कसा है। इस बार पुलिस की रडार पर केवल अपराधी ही नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम के वे लोग भी हैं जिनकी मिलीभगत से यह खेल चल रहा था।
5036 म्यूल अकाउंट्स और 72 करोड़ का खेल
बिहार पुलिस की जांच में अब तक 5036 म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) की पहचान की गई है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन खातों के माध्यम से करीब 72 करोड़ रुपये के साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया गया है। पुलिस ने इन खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और इनसे जुड़े संदिग्धों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
बैंकिंग अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में
इस बार की कार्रवाई में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब 22 विभिन्न बैंकों के अधिकारियों के नाम संदिग्धों की सूची में आए। पुलिस को अंदेशा है कि बिना बैंक कर्मियों की मिलीभगत के इतनी बड़ी संख्या में फर्जी या संदिग्ध खाते संचालित करना मुमकिन नहीं है। पुलिस अब इन अधिकारियों के क्रेडेंशियल्स और ट्रांजैक्शन लॉग की बारीकी से जांच कर रही है।
म्यूल अकाउंट: ठगी का वह ‘खच्चर’ जिसे पहचानना है मुश्किल
आम भाषा में ‘म्यूल’ का अर्थ खच्चर होता है। साइबर जगत में, म्यूल अकाउंट उन खातों को कहा जाता है जिनका उपयोग अपराधी अवैध धन को एक जगह से दूसरी जगह भेजने (Money Laundering) के लिए करते हैं।
- कैसे होता है इस्तेमाल: अपराधी गरीब या लालची लोगों को कुछ पैसों का लालच देकर उनके नाम पर खाता खुलवाते हैं।
- नियंत्रण: खाते का पासबुक, एटीएम कार्ड और लिंक किया गया सिम कार्ड अपराधी अपने पास रख लेते हैं।
- ट्रैकिंग में बाधा: जब पुलिस जांच करती है, तो वह उस व्यक्ति तक पहुंचती है जिसके नाम पर खाता है, जबकि असली अपराधी सुरक्षित बच निकलता है।
आम जनता के लिए पुलिस की अपील
बिहार पुलिस ने आम नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस का कहना है कि:
- कभी भी किसी अजनबी के कहने पर अपना बैंक खाता न खोलें।
- अपने बैंक खाते, ओटीपी या एटीएम पिन की जानकारी किसी से साझा न करें।
- किराये पर अपना बैंक खाता देना एक दंडनीय अपराध है, जिसमें आपको जेल हो सकती है।
निष्कर्ष: टूटेगा साइबर ठगों का नेटवर्क
साइबर प्रहार के पहले और दूसरे चरण की सफलता के बाद, 3.0 वर्जन से पुलिस को उम्मीद है कि अपराधियों का पूरा इकोसिस्टम ध्वस्त हो जाएगा। भागलपुर से लेकर पटना तक, पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं। यह कार्रवाई न केवल अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि बैंकिंग सिस्टम में बैठे उन भ्रष्ट अधिकारियों के लिए भी सबक है जो चंद पैसों के लिए अपराधियों का साथ दे रहे हैं।


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