Bihar: समधी मिलन से पहले ही उजड़ गई मांगलिक खुशियां; बेटी की विदाई तक परिजनों ने सीने में दबाए रखा पिता की मौत का राज
नालंदा, बिहार: नियति का खेल भी कितना अजीब और क्रूर होता है, इसका एक दहला देने वाला उदाहरण नालंदा जिले के नूरसराय थाना क्षेत्र से सामने आया है। जहाँ एक तरफ घर में बेटी के हाथ पीले हो रहे थे और मंगल गीत गाए जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ एक बेकाबू रफ्तार ने पिता की सांसों की डोर तोड़ दी। चरुईपर गांव में हुई इस हृदयविदारक घटना ने शादी के उत्सव को उम्र भर के दुख में तब्दील कर दिया है।
समधी मिलन की रस्म बनी आखिरी सफर
जानकारी के अनुसार, चरुईपर निवासी 45 वर्षीय आरजू पासवान की छोटी बेटी की शादी थी। बारात शेखपुरा जिले के बरबीघा से आई थी। गाजे-बाजे और उल्लास के बीच जब बारात दरवाजे पर पहुंची, तो रस्म के मुताबिक आरजू पासवान अपने समधी का स्वागत करने और उनसे गले मिलने (समधी मिलन) के लिए घर से बाहर निकले।
उसी समय बिहटा-सरमेरा टू-लेन सड़क पार करते वक्त एक तेज रफ्तार अनियंत्रित स्कॉर्पियो ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि आरजू पासवान काफी दूर जाकर गिरे। आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
परिजनों का अदम्य साहस: विदाई तक गुप्त रखी मौत की खबर
हादसे के बाद घर और परिवार में कोहराम मच गया, लेकिन यहाँ परिवार के बड़े-बुजुर्गों ने जो फैसला लिया, उसने हर किसी को भावुक कर दिया। बेटी की शादी और उसके भविष्य पर इस हादसे का साया न पड़े, इसलिए परिजनों ने पिता की मौत की खबर को दुल्हन और घर की अन्य महिलाओं से छिपाए रखा।
भारी मन और आंखों में आंसू दबाकर परिजनों ने शादी की सभी रस्में पूरी करवाईं। पूरी रात पिता का शव अस्पताल में पड़ा रहा और इधर घर में मंत्रोच्चार के बीच बेटी के फेरे हुए। बुधवार की सुबह जैसे ही बेटी की विदाई की रस्म पूरी हुई, परिजनों ने इस भयानक सच को सार्वजनिक कर दिया। खबर सुनते ही विदा हो रही बेटी और पूरा गांव चीख-पुकार से दहल उठा।
पुलिस की कार्रवाई: नंबर प्लेट से होगी हत्यारी गाड़ी की पहचान
घटना की सूचना मिलते ही नूरसराय पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल भेज दिया है। थाना प्रभारी अरविंद कुमार ने बताया कि दुर्घटनास्थल से आरोपी स्कॉर्पियो का एक टूटा हुआ नंबर प्लेट बरामद हुआ है। पुलिस इस नंबर के आधार पर वाहन मालिक और चालक की तलाश में छापेमारी कर रही है।
निष्कर्ष: खुशियों के आंगन में पसरा सन्नाटा
जिस घर से बेटी की डोली उठनी थी, अब वहाँ से पिता की अर्थी उठने की तैयारी हो रही है। इस घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। यह हादसा तेज रफ्तार के कहर और एक पिता के अपनी बेटी के प्रति उस सर्वोच्च बलिदान की याद दिलाता है, जहाँ परिवार ने दुख के पहाड़ के नीचे दबकर भी अपनी बेटी की खुशियों को आंच नहीं आने दी।


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