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​बिहार में ट्रैफिक नियमों का खेल खत्म! अब कैमरे काटेंगे ऑटोमैटिक चालान; जानें क्या है सरकार का ‘स्मार्ट’ प्लान

पटना। बिहार की सड़कों पर वाहन चलाने वालों के लिए एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर है। अब राज्य की सड़कों पर यातायात नियमों को तोड़ना आपकी जेब पर भारी पड़ने वाला है। बिहार सरकार राज्य में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) लागू करने की तैयारी पूरी कर चुकी है। इस नई व्यवस्था के तहत, अगर आप सिग्नल तोड़ते हैं या ओवरस्पीडिंग करते हैं, तो कोई पुलिसकर्मी आपको नहीं रोकेगा, बल्कि सड़क पर लगे हाई-टेक कैमरे अपने आप आपका चालान काट देंगे।

विश्वेश्वरैया भवन में हुई उच्चस्तरीय बैठक

​इस महत्वाकांक्षी परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए पटना के विश्वेश्वरैया भवन में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में देश-विदेश की कुल 42 प्रतिष्ठित कंपनियों, तकनीकी विशेषज्ञों और एआई (AI) आधारित संस्थाओं ने भाग लिया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य बिहार के यातायात को पूरी तरह तकनीक आधारित बनाना है।

10 वर्षों का लॉन्ग-टर्म मॉडल

​परिवहन विभाग इस प्रोजेक्ट को केवल ट्रायल के तौर पर नहीं, बल्कि एक स्थाई समाधान के रूप में देख रहा है। सरकार की योजना इसे अगले 10 वर्षों तक संचालित और संधारित (Maintenance) करने की है। इसके लिए ‘पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप’ (PPP) और ‘रेवेन्यू शेयरिंग’ मॉडल पर विचार किया जा रहा है, ताकि यह परियोजना वित्तीय रूप से बोझ न बने और लंबे समय तक सफलतापूर्वक चलती रहे।

ANPR कैमरों से होगी निगरानी

​परिवहन सचिव राज कुमार ने परियोजना की बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि राज्य के प्रमुख जंक्शनों और उन क्षेत्रों में जहाँ दुर्घटनाएं अधिक होती हैं, वहां ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरे लगाए जाएंगे।

इन कैमरों की विशेषताएं:

  • स्वतः पहचान: यह कैमरे वाहन की नंबर प्लेट को तुरंत स्कैन कर लेंगे।
  • नियम उल्लंघन: यदि कोई वाहन रेड लाइट जंप करता है, हेलमेट नहीं पहनता, या गलत दिशा में गाड़ी चलाता है, तो कैमरा उसकी फोटो खींच लेगा।
  • ई-चालान: डेटाबेस से वाहन मालिक की जानकारी निकालकर तुरंत उनके मोबाइल पर ई-चालान भेज दिया जाएगा।

जल्द जारी होगा टेंडर (RFP)

​विकास आयुक्त ने स्पष्ट किया कि ‘एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट’ (EOI) के माध्यम से कंपनियों से सुझाव ले लिए गए हैं। अब इन सुझावों के विश्लेषण के बाद जल्द ही आरएफपी (Request for Proposal) जारी किया जाएगा। इसके बाद एक सक्षम एजेंसी का चयन कर काम धरातल पर शुरू कर दिया जाएगा।

​इस बैठक में नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, यातायात एडीजी सुधांशु कुमार और राज्य परिवहन आयुक्त आरिफ अहसन सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे।

आम जनता के लिए क्यों जरूरी है यह खबर?

​अक्सर देखा जाता है कि पुलिस बल की अनुपस्थिति में लोग यातायात नियमों की अनदेखी करते हैं। यह नया सिस्टम सुनिश्चित करेगा कि कानून का पालन हर समय हो। इससे न केवल सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी, बल्कि यातायात का प्रवाह भी सुगम होगा।

निष्कर्ष

​बिहार में ‘स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम’ की शुरुआत राज्य के बुनियादी ढांचे में एक क्रांतिकारी बदलाव है। अत्याधुनिक कैमरों और एआई के इस्तेमाल से बिहार की सड़कें अब और सुरक्षित होंगी। वाहन चालकों को अब अपनी आदतों में सुधार करना होगा, क्योंकि अब आपकी हर हरकत पर ‘तीसरी आंख’ की नजर है।

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