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सासाराम: उपेंद्र कुशवाहा का बड़ा आरोप— “विपक्ष ने छीना महिलाओं का हक, परिसीमन रुकने से बिहार का नुकसान”

रोहतास/सासाराम: राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के सुप्रीमो और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा ने विपक्षी गठबंधन ‘इंडी’ (I.N.D.I.A.) पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। सासाराम में एक निजी कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने विपक्षी दलों को सीधे तौर पर ‘महिला और विकास विरोधी’ करार दिया। कुशवाहा का यह गुस्सा संसद में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को लेकर विपक्ष के असहयोग पर फूटा।

“महिलाओं के 33% आरक्षण के रास्ते में रोड़ा बना विपक्ष”

​उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि महिला आरक्षण बिल देश की आधी आबादी को मुख्यधारा की राजनीति में लाने का एक ऐतिहासिक अवसर था। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि यह बिल संसद से पारित हो जाता, तो हमारी माताओं-बहनों को विधायी संस्थाओं में 33% आरक्षण मिल जाता। विपक्ष ने सहयोग न करके करोड़ों महिलाओं की उम्मीदों को धक्का पहुँचाया है।

परिसीमन: बिहार की सीटें बढ़ने से रोकता रहा विपक्ष

​कुशवाहा ने परिसीमन बिल पर चर्चा करते हुए बिहार के राजनीतिक भविष्य का एक महत्वपूर्ण खाका खींचा। उन्होंने बताया कि वे वर्षों से परिसीमन के लिए अभियान चला रहे हैं।

  • लोकसभा: यदि परिसीमन बिल पास होता, तो बिहार में लोकसभा सीटों की संख्या 40 से बढ़कर 60 हो जाती।
  • विधानसभा: इसी तरह विधानसभा की सीटें 243 से बढ़कर 365 हो जातीं।

​उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि सीटों की संख्या बढ़ने से न केवल जनता का प्रतिनिधित्व बेहतर होता, बल्कि महिला आरक्षण लागू होने पर बड़ी संख्या में महिला नेतृत्व भी उभरकर सामने आता। विपक्ष ने अपनी राजनीति के चलते बिहार की इस प्रगति को रोक दिया है।

2029 का सपना और विपक्ष की राजनीति

​कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि एनडीए सरकार की मंशा इन सुधारों को समयबद्ध तरीके से लागू करने की थी ताकि 2029 के चुनावों में इसका लाभ मिल सके। लेकिन कांग्रेस समेत अन्य विपक्षी दलों ने जिस तरह का रवैया महिला आरक्षण और परिसीमन बिल पर अपनाया है, उसे आज पूरा देश देख रहा है।

​इस अवसर पर आरएलएम के जिला अध्यक्ष कपिल कुमार और अन्य वरिष्ठ पार्टी कार्यकर्ता भी मौजूद थे, जिन्होंने कुशवाहा के बयानों का समर्थन किया और जनता के बीच जाकर विपक्ष की पोल खोलने का संकल्प लिया।

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