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बिहार की सीमा पर ‘No Fuel’ नियम: नेपाली नंबर की गाड़ियों को पेट्रोल-डीजल देने पर लगी रोक, तस्करी पर लगाम की तैयारी

सीतामढ़ी/बैरगनिया। भारत और नेपाल की खुली सीमा पर इन दिनों ईंधन को लेकर एक नया संकट और सख्ती देखने को मिल रही है। नेपाल में पेट्रोल-डीजल की आसमान छूती कीमतों और आपूर्ति में आई भारी कमी (Fuel Lockdown) के बीच, भारत सरकार और स्थानीय प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब बिहार के सीमावर्ती जिलों में स्थित पेट्रोल पंपों पर नेपाली नंबर प्लेट वाले वाहनों को ईंधन देने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।

​यह आदेश मुख्य रूप से तस्करी (Smuggling) को रोकने और भारतीय उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जारी किया गया है।

कीमतों का बड़ा अंतर बना तस्करी की वजह

​नेपाल और भारत के बीच पेट्रोल-डीजल की कीमतों में जमीन-आसमान का अंतर है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार:

  • नेपाल में पेट्रोल की कीमत: ₹216.50 नेपाली (लगभग ₹135.35 भारतीय रुपया)
  • नेपाल में डीजल की कीमत: ₹204.50 नेपाली (लगभग ₹127.82 भारतीय रुपया)

​यह कीमत भारतीय सीमावर्ती जिलों की तुलना में पेट्रोल पर ₹28.79 और डीजल पर ₹31.82 अधिक है। इसी मुनाफे के चक्कर में सीमावर्ती क्षेत्रों में ईंधन की कालाबाजारी का नेटवर्क सक्रिय हो गया था। लोग भारत से सस्ता तेल खरीदकर नेपाल में ऊंचे दामों पर बेच रहे थे।

इन इलाकों में लागू हुआ नियम

​प्रशासन के आदेश के बाद सीतामढ़ी के सोनबरसा, सुरसंड, भिट्ठामोड़ और बैरगनिया जैसे प्रमुख सीमावर्ती नाकों पर सख्ती बढ़ा दी गई है। बैरगनिया सीमा से सटे नंदवारा स्थित पेट्रोल पंपों पर तो बकायदा पोस्टर लगा दिए गए हैं कि “नेपाली वाहनों को तेल नहीं दिया जाएगा।”

​सीतामढ़ी के अलावा यह नियम नेपाल से सटे बिहार के सात अन्य जिलों— बेतिया, मोतिहारी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज के पंपों पर भी प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है।

400 से अधिक पंपों पर नजर

​बिहार के इन सात सीमावर्ती जिलों में कुल मिलाकर 400 से अधिक पेट्रोल पंप हैं। इनमें से लगभग 120 पंप ऐसे हैं जो बॉर्डर से महज 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित हैं। अकेले सीतामढ़ी जिले में 15 से ज्यादा पंप नेपाल सीमा के एकदम करीब हैं।

​प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि नेपाली वाहनों की लंबी कतारों के कारण स्थानीय भारतीय उपभोक्ताओं को घंटों इंतजार करना पड़ता था और कई बार पंपों पर स्टॉक खत्म हो जाने की नौबत आ जाती थी। अब केवल भारतीय नंबर प्लेट वाले वाहनों को ही प्राथमिकता दी जा रही है।

नेपाल में ईंधन का संकट गहराया

​नेपाल के तराई क्षेत्र (वीरगंज, विराटनगर, जनकपुर आदि) में ईंधन की भारी किल्लत है। आपूर्ति में रुकावट के कारण वहाँ के कई पंप सूख चुके हैं। यही कारण है कि बड़ी संख्या में नेपाली नागरिक अपनी मोटरसाइकिल और गाड़ियां लेकर भारतीय सीमा में प्रवेश कर रहे थे। हालांकि, मानवीय आधार पर कुछ मामलों में छूट की बात कही जा रही है, लेकिन व्यावसायिक रूप से ईंधन ले जाने पर पूर्ण प्रतिबंध है।

प्रशासनिक सतर्कता और कार्रवाई

​तेल कंपनियों और प्रशासन के संयुक्त समन्वय से यह व्यवस्था लागू की गई है। पुलिस और सीमा सुरक्षा बल (SSB) को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे ड्रमों या गैलनों में तेल भरकर सीमा पार ले जाने वालों पर कड़ी नजर रखें।

निष्कर्ष:

भारत-नेपाल सीमा पर ‘नो फ्यूल’ नियम लागू होने से जहाँ एक तरफ तस्करी पर लगाम लगेगी, वहीं दूसरी ओर सीमावर्ती जिलों के स्थानीय निवासियों को ईंधन के लिए होने वाली दिक्कतों से राहत मिलेगी। यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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