संसद के विशेष सत्र से पहले JDU का बड़ा कदम: सांसदों के लिए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी, जानें क्या है सरकार का ‘सीक्रेट प्लान’
पटना/नई दिल्ली: देश की सियासत में आगामी 16 से 18 अप्रैल तक होने वाला संसद का विशेष सत्र बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के प्रमुख घटक दल जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने सभी लोकसभा और राज्यसभा सांसदों के लिए ‘थ्री-लाइन व्हिप’ जारी किया है।
हाजिरी अनिवार्य: 16 से 18 अप्रैल तक रहना होगा मौजूद
JDU नेतृत्व ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि पार्टी के सभी 12 लोकसभा और 4 राज्यसभा सांसद इन तीन दिनों के दौरान सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। व्हिप का उल्लंघन करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रावधान होता है, जिससे साफ है कि पार्टी इस सत्र को लेकर कितनी गंभीर है। गौरतलब है कि भाजपा (BJP) ने भी पहले ही अपने सांसदों को इसी तरह का व्हिप जारी कर दिया है।
क्यों बुलाया गया है विशेष सत्र?
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार इस सत्र में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण कानून) के क्रियान्वयन को सरल बनाने के लिए महत्वपूर्ण संशोधन पेश कर सकती है। इस कानून का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना है।
बड़े बदलाव की तैयारी: परिसीमन और सीटों की संख्या
विशेष सत्र के दौरान सरकार दो प्रमुख संवैधानिक संशोधनों पर विचार कर सकती है:
- जनगणना और परिसीमन: 2023 में पारित मूल कानून के अनुसार, आरक्षण नई जनगणना और परिसीमन के बाद ही लागू होना था। लेकिन जनगणना में देरी को देखते हुए सरकार अब 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन करने का प्रस्ताव ला सकती है।
- लोकसभा सीटों में बढ़ोतरी: प्रस्तावित संशोधनों के तहत लोकसभा सीटों की संख्या 543 से बढ़ाकर लगभग 816 की जा सकती है। इसमें से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
नीतीश कुमार की रणनीति
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार हमेशा से महिला सशक्तिकरण के पक्षधर रहे हैं। बिहार में उन्होंने पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50% आरक्षण देकर एक मिसाल पेश की थी। अब केंद्र में महिला आरक्षण को हकीकत बनाने के लिए वह पूरी तरह से एनडीए सरकार के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। व्हिप जारी कर उन्होंने यह सुनिश्चित कर दिया है कि मतदान की स्थिति में पार्टी का एक-एक वोट सरकार के पक्ष में पड़े।
व्हिप के मुख्य बिंदु:
- अवधि: 16 अप्रैल से 18 अप्रैल 2026।
- अनिवार्यता: सभी सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों की सदन में उपस्थिति।
- उद्देश्य: महत्वपूर्ण विधायी कार्यों और संवैधानिक संशोधनों का समर्थन।
निष्कर्ष: 16 अप्रैल से शुरू हो रहा यह सत्र न केवल देश की राजनीति बल्कि भारतीय लोकतंत्र के ढांचे को भी बदलने वाला साबित हो सकता है। क्या सरकार 816 सीटों का लक्ष्य हासिल कर पाएगी? यह देखना दिलचस्प होगा।



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