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बिहार में बड़ा बदलाव: सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर नीतीश सरकार ने लगाई रोक; ‘सात निश्चय-3’ के तहत जारी हुआ फरमान

पटना। बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अब राज्य के सरकारी अस्पतालों में कार्यरत डॉक्टर अपनी निजी प्रैक्टिस (Private Practice) नहीं कर पाएंगे। स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिया है, जिससे चिकित्सा जगत में हड़कंप मच गया है।

स्वास्थ्य सचिव ने जारी किया पत्र

​स्वास्थ्य विभाग के सचिव लोकेश कुमार सिंह के हस्ताक्षर से जारी इस आदेश के अनुसार, सरकारी सेवा में कार्यरत डॉक्टर अब न तो अपना निजी क्लिनिक चला सकेंगे और न ही किसी निजी अस्पताल में सेवा दे सकेंगे। यह नियम बिहार स्वास्थ्य सेवा संवर्ग और चिकित्सा शिक्षा सेवा से जुड़े सभी चिकित्सकों पर समान रूप से लागू होगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की 24 घंटे उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

‘सात निश्चय-3’ का हिस्सा है यह फैसला

​मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 16 दिसंबर 2025 को ‘सात निश्चय-3’ की घोषणा की थी। इसके पांचवें निश्चय ‘सुलभ स्वास्थ्य- सुरक्षित जीवन’ के तहत इस नीति का खाका तैयार किया गया था।

  • लक्ष्य: प्रखंड सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को विशिष्ट चिकित्सा केंद्र और जिला अस्पतालों को अति विशिष्ट चिकित्सा केंद्र के रूप में विकसित करना।
  • प्रोत्साहन: दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले डॉक्टरों के लिए अलग से प्रोत्साहन राशि (Allowance) की व्यवस्था की जाएगी ताकि उन्हें निजी प्रैक्टिस छोड़ने से होने वाले आर्थिक नुकसान की भरपाई की जा सके।

समृद्धि यात्रा के दौरान मिली थी झलक

​हाल ही में पश्चिम चंपारण के बेतिया में अपनी समृद्धि यात्रा के दौरान सीएम नीतीश कुमार ने इस कड़े फैसले के संकेत दिए थे। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि मरीजों को सरकारी अस्पतालों में बेहतर इलाज तभी मिलेगा जब डॉक्टर पूरा समय वहीं देंगे। अक्सर यह शिकायत मिलती थी कि डॉक्टर सरकारी समय के दौरान भी अपने निजी क्लिनिकों में व्यस्त रहते हैं, जिससे गरीब मरीजों को परेशानी होती थी।

नियमों का उल्लंघन करने पर होगी कार्रवाई

​सरकार जल्द ही इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइंस जारी करेगी। इसमें यह स्पष्ट किया जाएगा कि यदि कोई डॉक्टर आदेश के बाद भी चोरी-छिपे प्राइवेट प्रैक्टिस करता पाया जाता है, तो उस पर क्या दंडात्मक कार्रवाई होगी। माना जा रहा है कि इस फैसले से पीएमसीएच (PMCH), एनएमसीएच (NMCH) और अन्य मेडिकल कॉलेजों के वरिष्ठ प्रोफेसरों और डॉक्टरों पर बड़ा असर पड़ेगा।

निष्कर्ष: आम मरीजों को मिलेगी राहत

​सरकार के इस फैसले से ग्रामीण और शहरी इलाकों के गरीब मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। अब अस्पतालों में सीनियर डॉक्टर समय पर उपलब्ध होंगे और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा।

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