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बिहार: राजगीर में कुदरत और सिस्टम की मार, फुटपाथ पर सो रहे मासूम की टहनी गिरने से दर्दनाक मौत

राजगीर: बिहार की पर्यटन नगरी राजगीर से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने सबका दिल दहला दिया है। शुक्रवार की सुबह एक 7 वर्षीय मासूम के लिए काल बनकर आई। सड़क किनारे फुटपाथ पर सो रहे बच्चे के ऊपर पेड़ की एक विशाल टहनी गिर गई, जिससे उसकी मौके पर ही दबकर मौत हो गई। इस घटना के बाद मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है।

​कैसे हुआ यह दर्दनाक हादसा?

​यह घटना राजगीर थाना क्षेत्र के गौरक्षणी के पास शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे की है। मृतक की पहचान अमरजीत कुमार (7 वर्ष), पुत्र सोनू मांझी के रूप में हुई है। अमरजीत का परिवार सड़क किनारे फुटपाथ पर झोपड़ी बनाकर रहता है।

​परिजनों के अनुसार, शुक्रवार सुबह एक तेज रफ्तार ट्रक सड़क से गुजरा। ट्रक की ऊंचाई या उससे लगे झटके के कारण सड़क की ओर झुकी हुई पेड़ की एक भारी टहनी टूट गई और सीधे बाहर सो रहे अमरजीत के ऊपर जा गिरी। जब तक परिवार के लोग कुछ समझ पाते और उसे बाहर निकालते, मासूम दम तोड़ चुका था।

​गरीबी और मजबूरी का आशियाना

​अमरजीत का परिवार अत्यंत गरीब है। मृतक के नाना दशरथ मांझी ने बताया कि वे लोग ब्रह्म कुंड परिसर में भिक्षाटन (मांगकर) अपना गुजारा करते हैं। रात में सिर छिपाने के लिए फुटपाथ ही उनका एकमात्र सहारा था, लेकिन वही सहारा आज उनके बच्चे की मौत की वजह बन गया।

​प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल

​इस घटना के बाद स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि:

  • ​सड़क किनारे झुकी हुई सूखी और खतरनाक टहनियों की समय पर छंटाई नहीं की गई
  • ​पर्यटन नगरी होने के बावजूद फुटपाथ पर रहने वाले गरीबों की सुरक्षा के प्रति प्रशासन उदासीन है।
  • ​यदि वन विभाग या नगर परिषद ने समय रहते इन पेड़ों की जांच की होती, तो एक मासूम की जान बच सकती थी।

​पुलिस की कार्रवाई और जांच

​सूचना मिलते ही राजगीर थाना पुलिस मौके पर पहुँची। थानाध्यक्ष रमन कुमार ने बताया कि:

  1. ​शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बिहार शरीफ सदर अस्पताल भेज दिया गया है।
  2. ​प्राथमिक जांच के अनुसार, किसी अज्ञात बड़े वाहन की टक्कर या झटके से टहनी गिरने की बात सामने आ रही है।
  3. ​पुलिस इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है ताकि उस अज्ञात वाहन की पहचान की जा सके।

निष्कर्ष

​राजगीर की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि सिस्टम की उस खामी को भी दर्शाती है जहाँ सड़कों पर झुके मौत के जाल (पेड़ की टहनियां) किसी बड़े हादसे का इंतजार करते हैं। मासूम अमरजीत की मौत ने पूरे राजगीर को शोक में डुबो दिया है।

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