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रोहिणी आचार्य का भाजपा पर तीखा प्रहार: हिमंत बिस्वा सरमा के बयान को बताया ‘मानसिक असंतुलन’, भाषाई मर्यादा पर उठाए सवाल

पटना। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वाली रोहिणी ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा द्वारा कांग्रेस नेताओं के खिलाफ की गई टिप्पणियों को लेकर उन्हें और भाजपा नेतृत्व को आड़े हाथों लिया है।

“हार की बौखलाहट या मानसिक असंतुलन?”

​रोहिणी आचार्य ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा और मल्लिकार्जुन खड़गे के समर्थन में उतरते हुए भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि जब विपक्ष साक्ष्यों और दस्तावेजों के साथ भ्रष्टाचार के आरोप लगाता है, तो भाजपा नेता उसका तार्किक जवाब देने के बजाय गाली-गलौज और अपशब्दों का सहारा लेते हैं।

​रोहिणी ने हिमंत बिस्वा सरमा पर कटाक्ष करते हुए सवाल किया, “क्या यह आगामी चुनावों में संभावित हार की बौखलाहट है, या फिर हिमंत बिस्वा सरमा मानसिक असंतुलन की स्थिति में हैं?”

भाजपा की ‘कुसंस्कृति’ पर साधा निशाना

​रोहिणी ने भाजपा की राजनीतिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि भाषाई मर्यादा का उल्लंघन करना भाजपा की ‘कुसंस्कृति’ बन चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ‘संक्रमण’ से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री से लेकर पार्टी का हर छोटा-बड़ा नेता ग्रसित है। उन्होंने कहा कि एक सभ्य समाज और लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसी भाषा का कोई स्थान नहीं है जिसे भाजपा नेता विपक्ष के खिलाफ इस्तेमाल करते हैं।

अमित शाह और हिमंत के बयानों का जिक्र

​अपने बयान में रोहिणी ने संसद में गृह मंत्री अमित शाह द्वारा हाल ही में दी गई एक टिप्पणी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि देश अभी उस अभद्र टिप्पणी को भूला भी नहीं था कि अब हिमंत बिस्वा सरमा अपनी “ओछी और मवालियों जैसी भाषा” से देश की राजनीति को शर्मसार कर रहे हैं।

विवाद की पृष्ठभूमि: पवन खेड़ा बनाम हिमंत सरमा

​इस पूरे विवाद की जड़ कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी, रिनिकी भुइयां पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोप हैं। खेड़ा ने कुछ दस्तावेज पेश करते हुए जांच की मांग की थी।

​इसके जवाब में मुख्यमंत्री सरमा ने दावा किया कि खेड़ा यह सब राहुल गांधी के इशारे पर कर रहे हैं। सरमा ने तीखे लहजे में कहा था कि खेड़ा चाहे “पाताल” में भी छिप जाएं, असम पुलिस उन्हें ढूंढ लाएगी। इसी बयान के बाद से विपक्षी नेता भाजपा पर हमलावर हैं।

निष्कर्ष: बिहार की राजनीति में रोहिणी आचार्य की सक्रियता और उनके तीखे हमले आने वाले समय में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग को और तेज करने वाले हैं।

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