दरभंगा में ‘खाकी’ शर्मसार: सिपाही पत्नी को दूसरे जवान के साथ पति ने रंगे हाथों पकड़ा, कमरे में किया बंद; जानें पूरा मामला
दरभंगा/बिरौल: बिहार पुलिस के अनुशासित महकमे से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने विभाग की छवि पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। दरभंगा जिले के बिरौल थाना क्षेत्र में तैनात एक महिला सिपाही को उसके पति ने विभाग के ही एक अन्य पुरुष सिपाही के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पकड़ लिया। इस हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस को अपने ही कर्मियों को हिरासत में लेना पड़ा।
क्या है पूरी घटना?
जानकारी के अनुसार, यह मामला गुरुवार का है। दरभंगा जिला पुलिस बल में तैनात महिला सिपाही (संख्या 1115) और मधेपुरा पुलिस बल में तैनात पुरुष सिपाही (संख्या 697) के बीच लंबे समय से प्रेम प्रसंग की चर्चा थी। दोनों वर्तमान में बिरौल थाने में ही अपनी ड्यूटी निभा रहे थे।
महिला सिपाही के पति को काफी समय से अपनी पत्नी के आचरण पर संदेह था। गुरुवार को पति और परिवार के अन्य सदस्यों ने अचानक दबिश दी और दोनों सिपाहियों को एक साथ आपत्तिजनक हालत में देख लिया। गुस्से में आए परिजनों ने मौके का फायदा उठाते हुए दोनों को एक कमरे में बंद कर दिया और तुरंत इसकी सूचना बिरौल थानाध्यक्ष को दी।
थाने में मंचा हड़कंप, हिरासत में लिए गए सिपाही
जैसे ही सूचना बिरौल थाना अध्यक्ष तक पहुंची, पुलिस टीम मौके पर पहुंची। अपने ही साथियों को ऐसी स्थिति में पाकर पुलिस बल भी दंग रह गया। पति के लिखित आवेदन और मौके की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने दोनों सिपाहियों को हिरासत में ले लिया।
पूरे दिन थाने में गहमागहमी का माहौल बना रहा। सूत्रों की मानें तो अन्य पुलिसकर्मियों ने मामले को रफा-दफा करने और विभाग की बदनामी रोकने के लिए हस्तक्षेप करने की कोशिश भी की। अंततः, देर शाम दोनों सिपाहियों से PR बॉन्ड (Personal Release Bond) भरवाकर उन्हें रिहा कर दिया गया।
पति का गंभीर आरोप
महिला सिपाही के पति ने पुलिस को दिए आवेदन में स्पष्ट रूप से आरोप लगाया है कि उसकी पत्नी का उक्त सिपाही के साथ अवैध संबंध काफी समय से चल रहा था। उसने बताया कि उसने कई बार समझाने की कोशिश की, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद अब यह मामला विभागीय जांच के दायरे में आ गया है।
अधिकारियों का रुख
बिरौल थानाध्यक्ष चंद्रमणी ने मीडिया को बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही त्वरित कार्रवाई की गई थी। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई और बाद में नियमानुसार पीआर बॉन्ड पर छोड़ा गया। थानाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि इस पूरे मामले की विस्तृत रिपोर्ट वरीय पुलिस अधिकारियों को भेज दी गई है। अब विभागीय स्तर पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई का निर्णय लिया जाएगा।
निष्कर्ष
पुलिस विभाग जिसे समाज में नैतिकता और अनुशासन का प्रतीक माना जाता है, वहां इस तरह की घटनाएं विभाग के मनोबल और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाती हैं। दरभंगा की यह घटना अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है।



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