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सीएम नीतीश कुमार राज्यसभा के लिए चुने जा रहे आज; जब सांसद रहते MLA बने थे तो क्या किया था?

📝 खबर (WordPress के लिए डिटेल आर्टिकल)
बिहार की राजनीति में आज एक अहम दिन है। बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar को राज्यसभा के लिए चुना जा रहा है। राज्यसभा चुनाव के दौरान उनका नाम चर्चा में इसलिए भी है क्योंकि उनके राजनीतिक करियर में एक ऐसा दौर भी रहा है जब वे सांसद रहते हुए विधायक बन गए थे। उस समय उन्होंने क्या कदम उठाया था और उस फैसले के पीछे क्या वजह थी, इसे लेकर राजनीतिक हलकों में फिर चर्चा शुरू हो गई है।
आज राज्यसभा के लिए चुने जा रहे हैं
बिहार से राज्यसभा की खाली सीटों के लिए आज चुनाव प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसमें मुख्यमंत्री Nitish Kumar का नाम प्रमुखता से सामने है। उनके नामांकन के बाद से ही यह लगभग तय माना जा रहा है कि वे निर्विरोध या आसानी से राज्यसभा पहुंच जाएंगे, क्योंकि सत्तारूढ़ गठबंधन के पास पर्याप्त संख्या बल है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्यसभा में उनका जाना राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जब सांसद रहते बने थे विधायक
नीतीश कुमार के लंबे राजनीतिक सफर में एक दिलचस्प घटना भी जुड़ी हुई है। एक समय ऐसा आया था जब वे संसद के सदस्य यानी सांसद थे, लेकिन बाद में उन्होंने बिहार विधानसभा चुनाव लड़ा और विधायक भी बन गए।
उस दौरान उन्होंने संवैधानिक नियमों का पालन करते हुए संसद की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। भारतीय कानून के अनुसार कोई भी व्यक्ति एक साथ सांसद और विधायक दोनों पदों पर नहीं रह सकता।
क्यों लिया था ऐसा फैसला?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक उस समय Nitish Kumar ने राज्य की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए विधानसभा का रास्ता चुना था। बिहार की सत्ता और राज्य की नीतियों को सीधे तौर पर प्रभावित करने के लिए विधायक बनना उनके लिए जरूरी माना गया।
इसके बाद वे बिहार की राजनीति में और मजबूत हुए और बाद में मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे।
लंबा रहा राजनीतिक सफर
नीतीश कुमार का राजनीतिक करियर कई दशक लंबा रहा है। वे लोकसभा सांसद, केंद्रीय मंत्री और कई बार बिहार के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा वे संसद के उच्च सदन यानी Rajya Sabha के सदस्य भी रह चुके हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि उनका अनुभव और राजनीतिक समझ उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में भी एक महत्वपूर्ण नेता बनाती है।
आगे की राजनीति पर नजर
अब जब उन्हें दोबारा Rajya Sabha भेजा जा रहा है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि वे राष्ट्रीय स्तर पर किस तरह की भूमिका निभाते हैं। बिहार की राजनीति के साथ-साथ उनकी गतिविधियों पर पूरे देश की नजर रहेगी।

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